पूरा ब्रह्माण्ड पदार्थ (Matter) व ऊर्जा (Energy) का बना हुआ है। सभी जीवधारी पृथ्वी पर विद्यमान उन्हीं तत्वों से बने हैं जिनसे निर्जीव पदार्थ बने हैं। फिर भी जीवधारियों में अनेक विशेषताएं हैं जो कि निर्जीवों में नहीं मिलती। इसका कारण है – संगठन (organization)| जीवधारियों में यही तत्व विलक्षण संगठन प्रदर्शित करते हैं।
जैव जगत में संगठन के विभिन्न स्तर इस प्रकार हैं :
A. आण्विक स्तर का संगठन (Molecular Level of Organization) - विभिन्न तत्वों के परमाणु रासायनिक अभिक्रिया के फलस्वरूप अपनी संयोजकता के अनुसार संगठित होकर यौगिकों के अणु बनाते हैं। अणु ही पदार्थ की वे न्यूनतम इकाई हैं, जो स्वतंत्र रूप से रह सकते हैं। इस प्रकार बने अणुओं के बीच यदि पुनः रासायनिक अभिक्रिया हो तो जटिल यौगिक बन जाते हैं।
यौगिक के गुण इनके निर्माण में भाग लेने वाले तत्वों के गुणों से बिल्कुल भिन्न होते हैं। उदाहरण के तौर पर ग्लूकोज (Glucose – C6H12O6) का एक अणु कार्बन के 6 परमाणु, हाइड्रोजन के 12 परमाणु व ऑक्सीजन के 6 परमाणुओं से मिलकर बनता है। यह मीठा होता है, जबकि इसको बनाने वाले तत्वों कार्बन, हाइड्रोजन व ऑक्सीजन में कोई भी मीठा नहीं होता। इस प्रकार विभिन्न गुणों वाले असंख्य पदार्थ बन जाते हैं।
निर्जीव संसार में संगठन का स्तर यहीं पर समाप्त हो जाता है। परंतु जीव जगत में संगठन की प्रक्रिया आगे बढ़ती रहती है। अनेक प्रकार के अणु मिलकर एक विशेष प्रकार का पदार्थ बनाते हैं जिसे जीवद्रव्य कहते हैं।
जीवद्रव्य एक ऐसा पदार्थ है जिसमें सभी जैविक क्रियाएं हो सकती हैं। सभी जीवधारियों में और केवल जीवधारियों में ही यह पाया जाता है। इसलिए, हक्सले ने इसे जीवन का भौतिक आधार कहा है।
जीवद्रव्य के अतिरिक्त अन्य कई रचनाएं भी अणुओं द्वारा बनाई जाती है जिन्हें हम कोशिकांग कहते हैं। कोशिकांग व जीवद्रव्य मिलकर संगठन का अगला स्तर बनाते हैं। वास्तव में, जीवद्रव्य बनाने वाले विभिन्न अणुओं की व्यवस्था को ही आण्विक स्तर का संगठन कहते हैं।
शेष अगले नोट्स में ..