पुरंदर के किले को बचा पाने में असमर्थ जानकर शिवाजी ने 22 जून 1665 को जय सिंह के साथ संधि की , जिसे की पुरंदर की संधि कहकर पुकारा जाता है। इस की शर्तें इस प्रकार हैं: -
- शिवाजी ने देश के लिए और उससे लगे हुए उस प्रदेश को मुगलों को दे दिया जिसकी आय 4 लाख लोग थे। यह क्षेत्र मुगल साम्राज्य का अंग बन गया।
- सामान्य आय वाले यानी लगभग एक लाख वार्षिक उनकी आबादी 12 किले शिवाजी को अपने पास रखने थे।
- शर्त यह थी कि वह शाही तख्त का सेवक एवं राज भक्त बना रहेगा ।
- शिवाजी ने भविष्य में मुगल सम्राट की सेवा करने का आश्वासन दिया किंतु उसने अपने बेटे संभाजी को 5000 घुड़सवारी के एक दल के साथ सम्राट की सेवा में भेजने की बात कही इसके एवज में शिवाजी को उचित जागीर प्रदान करने का वचन दिया।
- इसके अतिरिक्त एक गुप्त संधि भी की गई जिसके अनुसार शिवाजी ने बीजापुर पर आक्रमण के समय मुगलों को अपने सहयोग देने का वचन दिया।
- सम्राट से यह आश्वासन चाहा कि बीजापुर का विघटन होने पर रियासत के कोंकण बालाघाट प्रदेश उसे मिल जाएंगे इसके बदले में सम्राट को 4000000 हुड तेरा वार्षिक किस्तों में चुकाने को तैयार हो गया ।
औरंगजेब ने भी इस संधि को अपनी पुष्टि प्रदान की इस संधि में एक बात यह भी कही गई थी कि शिवाजी व्यक्तिगत रूप से औरंगजेब से मुलाकात करेंगे शिवाजी को मुगल दरबार में लाने में जय सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका थी जय सिंह ने शिवाजी को सुरक्षा व सम्मान दिए जाने का आश्वासन दिया। दक्षिण में उससे मुगल सम्राट का वायसराय बनाने का आश्वासन भी दिया गया।
पुरन्दर की सन्धि का उल्लंघन :-
1670 में शिवाजी पुरंदर की संधि का उल्लंघन करते हुए मुगलों को दिए गए 23 किलो में से अधिकांश को जीत लिया। इसमें से कुंदन का किला सर्वाधिक महत्वपूर्ण था। इस किले को जीतने के दौरान तानाजी मालुसरे की मृत्यु हो गई।
शिवाजी फरवरी 1670 में इस किले का नाम बदलकर सिंहगण रख दिया था इसके बाद शिवाजी ने अक्टूबर 1670 में सूरत पर दूसरी बार आक्रमण किया और इसे बुरी तरह से लूटा सभी बात पूर्व सफलता के पश्चात शिवाजी ने दक्षिण के मुगल रियासतों और उसके अधीनस्थ राज्यों से चौथ व सरदेशमुखी लेना प्रारंभ कर दिया उन्होंने इस बात की घोषणा की कि महाराष्ट्र उनका है मुगलों का नहीं ।
1672 मे शिवाजी ने पन्हाला दुर्ग को भी बीजापुर से छीन लिया जिसमें अन्नाजी दत्तो ने काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी, जिसे कि शिवाजी का टोडरमल भी कहा जाता है।