शिवाजी का आगरा की ओर कूच

  •  मार्च 1666 में शिवाजी अपने बड़े पुत्र शंभाजी, प्रधान सरदारों तथा लगभग 4000 सैनिकों के साथ आगरा की ओर कूच किए।
  • वहां पर 9 मई 1666 को औरंगजेब से मुलाकात की परंतु शिवाजी के साथ औरंगजेब ने काफी अपमानजनक व्यवहार किया ।
  • शिवाजी की पहली नाराजगी इस बात को लेकर थी कि उसका स्वागत दरबार से बाहर नहीं किया गया दूसरी बात कि दरबार में 5 हजारी मनसब प्रदान कर उन्हें मनसब सरदारों की तीसरी पंक्ति में खड़े रहने को कहा गया।
  • इसके बाद अन्य उपस्थिति लोगों को औरंगजेब ने  खिल्लत से सम्मानित किया शिवाजी को नहीं।
  • अपमान्य शिवाजी ने क्रुद्ध होकर औरंगजेब को विश्वासघाती कहा और मुगल दरबार को छोड़कर चला गया।
  • औरंगजेब ने शिवाजी और उसके पुत्र को आगरा के जयपुर भवन में कैद कर लिया। संभवत शिवाजी की हत्या भी वह करवाना चाहता था।
  • जय सिंह तथा उसके पुत्र राम सिंह के कारण वह ऐसा नहीं कर सका बाद में शिवाजी व उसका पुत्र मुगल शासक को चकमा देकर मुगल कैसे भाग गए।
  • औरंगजेब ने उसके निकल भागने के पीछे राम सिंह और जय सिंह का हाथ समझा इसलिए राम सिंह को मुगलों की सेवा से मुक्त कर दिया गया जबकि जय सिंह को दक्षिण से वापस बुला लिया गया ।
  • कहा जाता है कि बुरहानपुर के पास 7 दिसंबर 1666 को जय सिंह को विश देकर औरंगजेब ने मरवा डाला ।
  • औरंगजेब के बाद दक्षिण के सूबेदारी मौसम को प्रदान की और उसकी सहायता हेतु मारवाड़ के शासक यशवंत सिंह को नियुक्त किया।
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