आपराधिक कानून ( संशोधन ) अधिनियम, 2018 के विषय में संक्षिप्त जानकारी

➡  11 अगस्त,  2018 को आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक , 2018 को राष्ट्रपति ने स्वीकृति प्रदान की ।

➡ यह अधिनियम 21 अप्रैल,  2018 से प्रभावी माना जाएगा।
 
➡  अधिनियम , भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 166-A, 228-A तथा 376 में संशोधन करता है तथा तीन नई धाराएं 376-AB, 376-DA और 376-DB जोड़ता है।
  
➡ अधिनियम के तहत 12 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के साथ बलात्कार के लिए मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है।
 
➡ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 में संशोधन द्वारा बलात्संग के लिए न्यूनतम दंडित 7 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष किया गया है ।
 
➡ नई धारा 376-AB के तहत 12 वर्ष से कम आयु की महिला से बलात्कार करने वाले अपराधी को न्यूनतम 20 वर्ष के कठोर कारावास किंतु जो आजीवन कारावास (शेष प्राकृत जीवन) तक हो सकेगा,  से तथा अर्थदंड अथवा मृत्युदंड से भी दंडित किए जाने का प्रावधान है ।
 
➡  धारा 376-DA 16 वर्ष कि किसी महिला के साथ एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा समूह में या सामान्य आशय के अग्रसरण में किए गए बलात्संग के लिए प्रत्येक को प्रथक प्रथक दोषी मानने तथा आवश्यक रूप से आजीवन कारावास से तथा अर्थदंड से भी दंडित किए जाने का उपबंध करती है ।
  
➡  धारा 376-DB 12 वर्ष तक कि किसी महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की स्थिति में प्रत्येक सामूहिक बलात्कार की स्थिति में प्रत्येक को प्रथक प्रथक दोषी मानने तथा आवश्यक रूप से आजीवन कारावास से तथा अर्थदंड या मृत्युदंड से भी दंडित किए जाने का उपबंध करती है ।
  
➡ दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा में संशोधन कर बच्चों से बलात्कार के अपराध की अन्वेषण प्रक्रिया को पूर्ण करने की अवधि 3 माह से घटाकर 2 माह तक कर दी गई ।

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