हिमालय की उत्पत्ति से पूर्व तिब्बत के मानसरोवर झील के पास से निकलने वाली सिंधु , सतलज एवं ब्रह्मपुत्र नदी टेथिस सागर में गिरता था। तथा प्रायद्वीपीय भारत की नदियां जैसे चंबल बेतवा केन सोन इत्यादि भी उत्तर प्रवाहित होती हुई टेथिस सागर में गिरती थी। टेथिस सागर के मलवे पर भारतीय प्लेट के दबाव से वृहद हिमालय की उत्पत्ति हुई जिसका उत्थान धीरे धीरे हुआ। फलस्वरुप सिंधुु सतलज तथा ब्रह्मपुत्र के मार्ग मेंं उठने वाली वृहद हिमालय को काट छांट कर अपने दिशा आगे बढ़ता रहा फलस्वरूप इस नदी को पूर्ववर्ती नदी कहा जाने लगा। इन तीनों नदियों ने वृहद हिमालय को काटकर खड़ेे कगार वाले खड्डे का निर्माण किया है जिन्हें गार्ज कहा जाता है ।
जैसे - सिंधु गार्ज जम्मू कश्मीर में सिंधु नदी द्वारा बनाया गया है, शिपकीला गार्ज हिमाचल प्रदेश में सतलज नदी द्वारा बनाया गया है, कोरबा गार्ज अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मपुत्र नदी द्वारा बनाया गया है। यदि हिमालय को धीरे-धीरे ऊपर उठते रहने की दौरान वर्षा का जल हिमालय पर नदी घाटी का विकास किया। वृहद हिमालय की चोटियों के हिमरेखा से ऊपर उठनेे के पश्चात वृहद हिमालय पर बर्फ का आवरण हो गया जिनसे निकले हिमनद, नदियों द्वारा बनाई गई घाटियों से होकर बहने लगे। इस प्रकार वृहद हिमालय में पहले नदी घाटी बनी फिर हिमनद ।
इन नदियों को अनुवर्ती नदी कहा जाता है, क्योंकि यह ढाल बनाने की पश्चात ढाल के अनुरूप बहना आरंभ करती है।