क्रमशः..
Day -18
क्रिप्स मिशन,1942
जब ब्रिटिश सरकार को यह पूर्ण विश्वास हो गयागया कि भारतियों कि माँगों की अधिक दिनों तक उपेक्षा नहीं की जा सकती है; तब प्रधानमंत्री चर्चिल ने ‘सर स्टेफर्ड क्रिप्स’ के नेतृत्व में एक दूत-मंडल भारत भेजा जो ‘क्रिप्स-मिशन’ के नाम से जाना गया। क्रिप्स-मिशन के प्रस्ताव पे ब्रिटिश सरकार ने भारत के बारे में निम्नलिखित सुधारों की घोषणा की-
- युध्द समाप्त होने के पश्चात् एक निर्वाचित संविधान सभा की स्थापना की जायेगी जो भारत के लिए संविधान बनायेगी।
- संविधान सभा में (Constituent Assembly) भारतीय राज्यों के प्रतिनिधि भी सम्मिलित किये जायेंगे।
- संविधान सभा द्वारा तैयार संविधान को ब्रिटिश सरकार उसी स्थति में लागू करेगी। जबकि ब्रिटिश भारत के प्रान्त और देशी रियासते उसमे सहमत हो। जो प्रान्त भारत में नए संविधान को स्वीकार नही करेंगे उन्हें अपना पृथक संविधान बनाने का अधिकार होगा। उनके साथ ब्रिटिश सरकार के वही संबंध होगे जो शेष भारतीय संघ के साथ होगे इसी प्रकार देशी रियासतो को भी इस संविधान को स्वीकार करने अथवा अस्वीकार करने का अधिकार होगा|
- युध्द समाप्त होने के बाद प्रान्तीय विधान-सभाओं का चुनाव किया जाना था जो संविधान निर्मात्री सभा का चुनाव करती। संविधान सभा के सदस्यों की संख्या प्रान्तीय विधान-सभाओं की संख्या का 1/10 भाग से अधिक नहीं हो सकती थी। इस में भारतीय नेताओं के सहमत न होने पर युध्द के पहले परिवर्तन भी किया जा सकता था।
- युध्द-काल में भारत की प्रतिरक्षा का उत्तरदायित्व ब्रिटिश सरकार के ऊपर होगा, परतु सैनिक, नैतिक और भौतिक रूप के संगठन तथा सहयोग का उत्तरदायित्व भारत सरकार पर होगा।
क्रिप्स मिशन की असफलता के कारण
क्रिप्स मिशन के प्रस्ताव भारतीय राष्ट्रवादियों को संतुष्ट करने में असफल रहे तथा साधारण तौर पर भारतीयों के किसी भी वर्ग की सहमति नहीं प्राप्त कर सके। विभिन्न दलों तथा समूहों ने अलग-अलग आधार पर इन प्रस्तावों का विरोध किया। कांग्रेस ने निम्न आधार पर प्रस्तावों का विरोध किया-
- भारत को पूर्ण स्वतंत्रता के स्थान पर डोमिनियन स्टेट्स का दर्जा दिये जाने की व्यवस्था।
- देशी रियासतों के प्रतिनिधियों के लिये निर्वाचन के स्थान पर मनोनयन की व्यवस्था।
- प्रांतों को भारतीय संघ से पृथक होने तथा पृथक संविधान बनाने की व्यवस्था, जो कि राष्ट्रीय एकता के सिद्धांत के विरुद्ध था।
- सत्ता के त्वरित हस्तांतरण की योजना का अभाव तथा प्रतिरक्षा के मुद्दे पर वास्तविक भागीदारी की व्यवस्था का न होना; गवर्नर जनरल की सर्वोच्चता पूर्ववत थी; तथा गवर्नर-जनरल को केवल संवैधानिक प्रमुख बनाने की मांग को स्वीकार न किया जाना।
मुस्लिम लीग ने भी क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया तथा इसके लिये निम्न तर्क दिये-
- एकल भारतीय संघ की व्यवस्था का होना उसे स्वीकार्य नहीं था।
- संविधान निर्मात्री परिषद के गठन का जो आधार सुनिश्चित किया था वह उसे स्वीकार्य नहीं था तथा प्रांतों के संघ से पृथक होने तथा अपना पृथक संविधान बनाने की जो विधि निर्धारित की गयी थी, उससे भी लीग असहमत थी।
- प्रस्तावों में मुसलमानों के आत्म-निर्धारण के सिद्धांत तथा पृथक पाकिस्तान की मांग को नहीं स्वीकार किया गया था।
क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों में यह भी अस्पष्ट था कि सत्ता के हस्तांतरण संबंधी प्रावधानों को कौन लागु करेगा तथा कौन इनकी व्याख्या करेगा। वायसराय के वीटो (निषेधाधिकार) के मुद्दे पर स्टेफर्ड क्रिप्स तथा कांग्रेस के नेताओं के मध्य बातचीत टूट गयी।
कैबिनेट मिशन, 1946
फरवरी 1946 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एटली ने भारत में एक तीन सदस्यीय उच्च-स्तरीय शिष्टमंडल भेजने की घोषणा की। इस शिष्टमंडल में ब्रिटिश कैबिनेट के तीन सदस्य- लार्ड पैथिक लारेंस (भारत सचिव), सर स्टेफर्ड क्रिप्स (व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष) तथा ए.वी. अलेक्जेंडर (एडमिरैलिटी के प्रथम लार्ड या नौसेना मंत्री) थे। इस मिशन को विशिष्ट अधिकार दिये गये थे तथा इसका कार्य भारत को शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण के लिये, उपायों एवं संभावनाओं को तलाशना था। कैबिनेट मिशन ने भारत के लिए निम्न योजना प्रस्तुत की-
- ब्रिटिश भारत और प्रान्तों को मिलाकर भारत का एक संघ होना चाहियेऔर कुछ राष्ट्रीय हितों के विषय को छोड़कर अन्य सभी विषय प्रान्तों के अधिकार-क्षेत्र में रहने चाहिए।
- भारत पर ब्रिटिश सरकार की प्रभुसत्ता को समाप्त कर देना चाहिए।
- भारतीय रियासतों को यह छुट होनी चाहिए कि वे संघ में सम्मिलित हों या स्वतन्त्र रहें।
- एक अन्तरिम सरकार की तत्काल स्थापना की जाय जिसे भारत के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त हो।
- संविधान बनाने के लिए संविधान-सभा का निर्वाचन शीघ्र होना चाहिए।
कैबिनेट मिशन के प्रस्तावों को भारतीयों ने स्वीकार कर लिया मिशन के सुझावों के परिणामस्वरुप जुलाई,1946 में संविधान के अनुसार संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन हुआ।
जारी..
मिलते है हम अगले दिन, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 विषय पर चर्चा करने के लिये..