ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के आर्थिक नीति -3

3 - पहले के दो चरणों में प्राप्त धन को भारत में ही निवेश कर अतिरिक्त पूंजी कमाई गई इस दौर में रेलवे बैंकिंग बीमा बागान आदि अवसंरचना  की स्थापना की गई किंतु इसका मूल उद्देश भारत का आधुनिकरण नहीं बल्कि ब्रिटिश पूंजीपतियों को अधिकतम लाभ देना था तकनीकी दृष्टिकोण से निवेश के द्वारा भारत के कच्चे माल की आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखा जा सकता था अर्थात भारत को स्थाई रूप से अपने प्रभाव में रखा गया ।

                   भू राजस्व नीतियां 

   मुख्य रूप से अंग्रेजों ने भारत में निम्न प्रकार की भू-राजस्व पद्धतियां अपनाई - 

1- इजारेदारी प्रथा ( अल्प समय तक )

2- जमींदारी या अस्थाई बंदोबस्त

3- रैयतवाड़ी प्रथा

4- महालवाड़ी प्रथा 

    उद्देश :

              अंग्रेज की भू-राजस्व नीतियों का उद्देश्य कम से कम प्रशासनिक लागत पर निश्चितता के साथ ज्यादा भू राजस्व की वसूली करना था ।

  कारण : 

             1- कंपनी भू-राजस्व को निवेश की तरह इस्तेमाल करती थी

2- अधीनस्थ क्षेत्रों में प्रशासन का खर्चा उठाना था 

3- भारत के भीतर एवं बाहर निरंतर किए जा रहे सैन्य अभियानों का खर्चा उठाना था जैसे मैसूर,  मराठा , बर्मा ।

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