ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की आर्थिक नीति -4

                        इजारेदारी प्रथा

   1772 में वारेन हेस्टिंग्स  ल इसे लागू किया इसका मुख्य उद्देश्य अधिक भू राजस्व वसूल करना था ।

 विशेषताएं :

                 1- इसमें पंचवर्षीय ठेके  की व्यवस्था थी  ।

2- सबसे अधिक बोली लगाने वाले को भूमि ठेके पर दी जाती थी ।

        परंतु इस व्यवस्था से कंपनी को ज्यादा लाभ नहीं हुआ क्योंकि इस व्यवस्था में उसका वसूली अस्थिरता आ गई अब भू राजस्व की वसूली का ठेका प्रतिवर्ष किया जाने लगा इसमें भू राजस्व दर तथा वसूल की रात की राशि प्रति वर्ष परिवर्तित होने लगी दूसरी तरफ चूंकि की इजारेदारो को भूमि पर अस्थाई स्वामित्व होता था फलस्वरूप भूमि सुधारों में कोई रुचि नहीं लेते थे इस व्यवस्था से किसानों का शोषण बढ़ा ।

                    स्थाई बंदोबस्त 

      लार्ड कार्नवालिस से पूर्व लगान व्यवस्था दोषपूर्ण थी वारेन हेस्टिंग के समय भूमि ठेके पर दी जाती थी जो व्यक्ति सबसे ऊंची बोली लगाता था उसे उसे ही लगान वसूल करने का ठेका दे दिया जाता था इस व्यवस्था से किसानों की दशा सोचनीय हो गई क्योंकि ठेकेदार बहुत ऊंची बोली बोलते थे तथा किसानों से अधिक से अधिक धन वसूल करने का प्रयत्न करते थे वे कर वसूली करते समय कृषकों पर भीषण अत्याचार करते थे अतः पंमनी के संचालकों ने लांर्ड कार्नवालिस को लगान व्यवस्था में सुधार करने के लिए भेजा ।

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