बंगाल में सर्वप्रथम अंग्रेजों को व्यापारिक छूट 1651 में प्राप्त हुई जब ग्रेवियन बटन ने जो बंगाल के सूबेदार शाहसोजा के साथी दरबारी चिकित्सक के रूप में रहता था इसने एक लाइसेंस अंग्रेजी कंपनी के लिए प्राप्त किया इसके द्वारा ₹3000 वार्षिक वार्षिक कर के बदले में कंपनी को बंगाल बिहार और उड़ीसा में मुक्त व्यापार करने की अनुमति प्रदान दी गई|
1656 में एक दूसरा निशान मंजूर किया गया जिसके तहत बिना किसी बाधा के अंग्रेजों को व्यापार करने की अनुमति पुनः पोस्ट की गई कंपनी ने शतक से 1672 ईसवी में एक फरमान जारी किया गया जिसमें उसे कर अदा करने से मुक्ति मिल गई बादशाह औरंगजेब ने 1680 में एक फरमान जारी किया जिसमें यह आदेश दिया कि कोई चुंगी के लिए कंपनी के कर्मचारियों को तंग ना करें ना उसके व्यापार में रुकावट डालें इसमें यह भी आदेश दिया गया कि अंग्रेजों से 2% चुंगी के अतिरिक्त 1.5 प्रतिशत जजिया कर के रूप में दिया जाए |अक्टूबर 1686 में अंग्रेजों ने हुगली को लूट लिया परंतु औरंगजेब द्वारा पराजित होने पर वे हुगली से भाग खड़े हुए jobchaarnaak,अगस्त 1690 में सोता नाती में एक अंग्रेजी कोठी स्थापित की |इस प्रकार ब्रिटिश भारत की भावी राजधानी कलकत्ता पड़ी|
इंग्लैंड के सम्राट के सम्मान में उक्त किला बंद व्यवसायिक प्रतिष्ठान का नाम फोर्ट विलियम रखा गया सर चाल शायर इसका पहला प्रेसिडेंट हुआ सन 1700 भी में यह पहला प्रेसिडेंसी नगर घोषित किया गया| जो,सन 1774 से 1911 तक ब्रिटिश भारत की राजधानी रहा|