उत्तराखंड उच्च न्यायालय : गाय का अभिभावक

➡ 10 अगस्त , 2018 को उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में गायों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने हेतु स्वयं को इसका वैधानिक अभिभावक नियुक्त किया है ।

➡ इस संबंध में राज्य उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के लिए 31 दिशानिर्देश जारी किए हैं ।
 
➡ निर्देशों के तहत प्रत्येक 25 गांव पर एक गौशाला का निर्माण और ऐसे लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया गया है , जो अपने पशुओं को खुला छोड़ देते हैं।
 
➡  उच्च न्यायालय का यह निर्णय 'पेरेन्स पैटरी' सिद्धांत से प्रेरित है , जिसका अर्थ 'देश का अभिभावक' होता है ।

➡  यह सिद्धांत न्याय व्यवस्था को उन लोगों का संरक्षक/अभिभावक नियुक्त करने की वकालत करता है , जो स्वयं अपनी मदद नहीं कर सकते हैं ।
  
➡ न्यायालय ने राज्य में गाय , बैल एवं बछड़ों के वध पर रोक लगाने के साथ ही गौमांस के किसी भी प्रकार के व्यापार पर पूर्णता प्रतिबंध लगा दिया है ।
 
➡ न्यायालय ने उन लोगों पर भारतीय दंड संहिता ,पशुधन क्रूरता अधिनियम ,1960 और उत्तराखंड गाय की संतति संरक्षण अधिनियम ,2007 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है जो अपने पशुओं को खुला छोड़ देते हैं।
 
➡  न्यायालय ने गाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र में पुलिस उपाधीक्षक स्तर के पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष दस्ते के गठन का आदेश दिया है । इस विदेश दस्ते में गायों की देखभाल हेतु एक पशु डॉक्टर भी होगा ।

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