बहादुर शाह प्रथम और जहांदार शाह के बारे में संक्षिप्त जानकारी-

बाहादुरशाह प्रथम (मुअज्जम) 1707-1712
बहादुर शाह प्रथम एक योग विद्वान व्यक्ति था वह समझौते तथा मेल मिलाप की नीति के अनुसरण करके शाही दरबार के अधिकांश गुटों का सहयोग प्राप्त करने में सफल रहा इसने औरंगजेब द्वारा अपनाई गई संकीर्णतापूर्ण नीतियों के उलट हिंदू सरदारों राजाओं के प्रति सहिष्णुता पूर्ण नीति अपनाई।
इसने मराठों तथा राजपूतों के प्रति मैत्री पूर्ण नीति अपनाई।1717 ई. में इसने शम्भाजी के पुत्र शाहू को मुगल कैद से मुक्त कर दिया बहादुर शाह ने सिक्खों के दसवें गुरु गोविंद सिंह के साथ मेल मिलाप के संबंध स्थापित किए एवं उन्हें संतुष्ट करने के लिए गुरु के सम्मान के खिलअत एवं उच्च मनसब प्रदान किए किंतु गोविंद सिंह की मृत्यु के बाद एक सिख नेता  बंदा बहादुर के नेतृत्व में पंजाब में सिखों ने बगावत कर दी  इससे तंग आकर बहादुर शाह ने सिक्खों  के खिलाप कड़ी कारवाई करने का फैसला किया।

जहांदार शाह (1712-1713)
1712 ई. में बहादुर शाह की मृत्यु के पश्चात जहांदार शाह शासक बना। जहांदार शाह को सिंहासन प्राप्त करने में जुल्फिकार खां का सहयोग प्राप्त हुआ इसने मुगल साम्राज्य को मजबूत बनाने के उद्देश्य से राजपूत, राजाओं एवं मराठा सरदारों के साथ मैत्रीपूर्ण  संबंध स्थापित किए जहांदार शाह अमीर के राजा सवाई जय सिंह को मालवा का सूबेदार नियुक्त किया तथा मिर्जा की उपाधि दी, साथ‌‌ ही मारवाड़ के राजा अजीत सिंह को गुजरात का सूबेदार तथा महाराजा की उपाधि प्रदान की ।
1713 ई. में जहांदार शाह का भतीजा फार्रुखसियर सर सय्यद बंधुओं के सहयोग से उसे परास्त कर सिंहासन पर बैठा।

Posted on by