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Nainshy Patel
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त्रिपुरी अधिवेशन और सुभाष चंद्र बोस।
कांग्रेस का त्रिपुरी अधिवेशन जनवरी 1939 में संपन्न हुआ ।
इस अधिवेशन में सुभाष चंद्र बोस पुना कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए खड़े किए गए, जबकि गांधी जी सहित उनके साथी कांग्रेसी इसके पक्ष में नहीं थे और उन्होंने पट्टाभी सीता रमैया को उनके सामने खड़ा कर दिया ।
सुभाष चंद्र बोस का कहना था की दक्षिणपंथी की समझौता परस्त नीति का विरोध करने के लिए आवश्यक है कि वह पुनः खड़े हो।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस में गांधी वादियों का बहुमत हो जाने की वजह से वे दक्षिणपंथी कहलाने लगे थे।
सुभाष चंद्र बोस के अनुसार गांधी वादियो ने तत्कालीन परिस्थितियों का सही आकलन नहीं किया है तथा वे इस समय ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध संघर्ष आरंभ नहीं करना चाहते हैं तो वामपंथियों के लिए यह आवश्यक हो गया कि अपनी स्थिति को सुदृढ़ करके कांग्रेस में बहुमत प्राप्त करें।
क्योंकि ऐसा करके ही कांग्रेस के तत्वाधान में फिर से स्वतंत्रता का संघर्ष आरंभ कर सकते हैं।
यह प्रथम अवसर था जब कांग्रेस में अध्यक्ष पद के लिए सर्वसम्मति से कोई फैसला ना होकर चुनाव करना पड़ा चुनाव में पट्टाभी सीता रमैया की हार हुई थी।
इसमें सुभाष चंद्र बोस 1377 के मुकाबले 1580 मतों से चुने गए उन्हें बंगाल व पंजाब में भारी बहुमत मिला तथा केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, संयुक्त प्रांत और असम में पर्याप्त बढ़त मिली।
केवल गुजरात, बिहार, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश में कमोवेश जमकर सीता रमैया के पक्ष में मत दिया। पठ
पट्टाभि सीता रमैया की हार पर गांधी जी ने कहा था- "पट्टाभी की हार मेरी हार"।
पहले गांधी जी ने पट्टाभि के स्थान पर मौलाना अबुल कलाम आजाद को अपनी तरफ से नामित किया था, परंतु उनके द्वारा अपना नाम वापस ले लेने पर गांधी जी ने सीता रमैया को ही अपना प्रत्याशी घोषित किया था।
यह चुनाव कांग्रेस के इतिहास में सर्वाधिक चर्चित सशक्त तथा उसके चरित्र को व्यक्त करने वाला रहा।
अपने अध्यक्षीय भाषण में सुभाष चंद्र बोस ने कहा था कि हमें सत्याग्रह की अनुमति मिली है मैं जानता हूं कि ब्रिटिश सरकार अखिल भारतीय स्तर के सत्याग्रह जैसे संघर्ष का लंबे अरसे तक सामना करने की स्थिति में नहीं है।
मुझे देखकर अफसोस होता है कि कांग्रेस में ऐसे लोग भी हैं जो यह सोचने में असमर्थ हैं कि अभी ब्रिटिश साम्राज्यवाद पर एक बड़ा आक्रमण करने का समय नहीं आया है।
8 प्रांतों की सरकार कांग्रेस के हाथों में है भारतीय रियासतों में अभूतपूर्व जागृति है और विश्व की स्थिति हमारे पक्ष में है मैंने पहले भी स्वराज जी की दिशा में तेजी से बढ़ने का जिक्र किया था इसके लिए पर्याप्त तैयारी की जरूरत है।
परंतु कांग्रेस कार्यकारिणी समिति के सदस्यों से सुभाष चंद्र बोस के मतभेद होने की वजह से इसके 15 सदस्यों में से 13 सदस्यों ने त्यागपत्र दे दिया।
जिसकी वजह से सुभाष चंद्र बोस ने इसी समय 29 अप्रैल 1939 को कांग्रेस के अध्यक्ष अध्यक्ष पद से त्याग पत्र देते हुए मई 1939 में फॉरवर्ड ब्लॉक नामक एक नई राजनीतिक संस्था का निर्माण कांग्रेस के अंतर्गत ही किया ।
इसी समय से इस दल की साप्ताहिक मुख्य पत्रिका फॉरवर्ड ब्लॉक भी कोलकाता से प्रकाशित की गई सुभाष चंद्र बोस इसके संपादक थे।
सुभाष चंद्र बोस के इस्तीफे के बाद डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने कांग्रेस के अध्यक्ष पद की कमान संभाली।
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