स्थाई प्रबंध के प्रमुख व्यवस्थाएं -
1793 में स्थाई प्रबंध की प्रमुख व्यवस्थाएं निम्लिखित थी ।
1- जमींदारों की भूमि का वास्तविक स्वामी मान लिया गया ।
2- जमींदारों से लिया जाने वाला लगान सदैव के लिए निर्धारित कर दिया गया यह भी कहा गया कि सरकार द्वारा निर्धारित लगान को कभी भी बढ़ाया नहीं जाएगा ।
3- जब तक जमींदारा अपने हक का लगान देता रहेगा उसकी भूमि छिनी नहीं जाएगी , परंतु यदि उसने निर्धारित समय लगान जमा नहीं कराया तो उसकी भूमिका कुछ भाग लगान की वसूली के लिए सरकार बेच सकेगी ।
4- चूंकि राज्य भू स्वामित्व अधिकार से मुक्त हो गया अतः जमींदारों से किसी अन्य कर का दावा नहीं किया जाएगा ।
5- जमींदारों के समस्त न्यायिक अधिकार छीन लिए गए ।
6- जमीनदारों तथा उसकी रैयत के बीच संबंधों के बारे में जमींदारों को स्वतंत्र कर दिया गया किंतु जमींदारों से कहा गया कि वह अपनी रैयत को पट्टे देंगे इन पट्टों में जमींदारों और किसानों के संबंधों का उल्लेख होता था यदि कोई जमींदार अपने किसानों को दिए गए पट्टे का उल्लंघन करेगा तो किसान उसके विरुद्ध न्यायालय में जाने का पूर्ण अधिकार होगा ।
7- जमींदार भूमि का मालिक होने के कारण भूमि को बेच दिया खरीद सकते हैं ।