शिकागो धर्म सम्मेलन

  •  स्वामी विवेकानंद शिकागो के लिए मुंबई से पेनिनसुलार  जहाज से 30 मई 1893 को रवाना हुए।
  • 11 सितंबर 1893 में शिकागो के कोलंबस हाल में यह सम्मेलन प्रारंभ हुआ यह विश्व का प्रथम धर्म संसद था ।
  • स्वामी विवेकानंद की वारी आई तो उन्होंने अपनी परंपरागत अभिवादन शैली में मेरे प्रिय भाइयों एवं बहनों से अपना भाषण प्रारंभ किया जिससे वहां मौजूद दर्शक काफी प्रसन्न हुए ।
  • इसके बाद स्वामी विवेकानंद ने भारतीय दर्शन की आध्यात्मिक गहराइयों को अपनी अद्भुत वक्तृत्व शैली के माध्यम से पूरे विश्व को परिचित कराया।
  • यहीं पर स्वामी विवेकानंद ने कहा था जिस प्रकार विश्व की विभिन्न नदियां समुद्र में जाकर मिल कर एक हो जाती हैं उसी प्रकार विश्व के विभिन्न धर्म एक ही चरम सत्य तक पहुंचने के भिन्न-भिन्न मार्ग है ।
  • रोमा रोला ने उनकी इस भाषण को ज्वाला की देह कहकर पुकारा वहां पर उनको जबरदस्त प्रसिद्धि मिली ।
  • फरवरी 1895 में इन्होंने न्यूयॉर्क में वेदांत सोसाइटी की स्थापना की जिसका उद्देश्य भारतीय धर्म और प्रदर्शन का अमेरिका में प्रचार-प्रसार करना था।
  • भारत में 1897 में अपने गुरु के विचारों को फैलाने के लिए उन्होंने कोलकाता के वेलूर नामक स्थान पर रामकृष्ण मिशन की स्थापना की ।
  • स्वामी विवेकानंद के विचारों से अमेरिका में आयरलैंड की एक महिला मार्केट नेबुला काफी प्रभावित थी जो बाद में उन्हीं के साथ भारत चली आई थी इनका नाम स्वामी जी ने बदलकर सिस्टर निवेदिता कर दिया और उन्हें रामकृष्ण मिशन का प्रधान बना दिया।
  • सिस्टर निवेदिता ने द वे ऑफ इंडिया लाइफ नामक पुस्तक की रचना की ।
  • स्वामी विवेकानंद ने पेरिस में 1902 में आयोजित दूसरे धर्म सम्मेलन में भी भाग लिया।
  • सुभाष चंद्र बोस ने स्वामी विवेकानंद की को आधुनिक राष्ट्रीय आंदोलन का आध्यात्मिक पिता जबकि सिस्टर निवेदिता ने योद्धा सन्यासी कहकर पुकारा ।
  • स्वामी ने कहा था कि हमारा धर्म रसोई घर में बंद है और हमारा ईश्वर खाना पकाने के बर्तन में बंद है स्वामी जी का नव युवकों के लिए संदेश था कि उठो जागो और चलो तब तक चलो जब तक कि अपने लक्ष्य को न प्राप्त कर लो ।
  • 1902 में 39 वर्ष की अवस्था में उनकी मृत्यु हो गई।
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