न्यायाधीशों पर महाभियोग-

यदि न्यायाधीश पर दुर्व्यवहार अथवा अक्षमता या साबित कदाचार का दोष सिद्ध हो जाता है, तो न्यायाधीश को पद मुक्त करने के लिए उस पर महाभियोग की प्रक्रिया अपनाई जाती है यह निन्न प्रकार से लगाई जाती है।

1- लोकसभा के कम से कम 100 या राज्य सभा के कम से कम 50 सदस्यों द्वारा राष्ट्रपति को संबोधित एक प्रस्ताव लोक सभा के अध्यक्ष या राज्य सभा के सभापति को दिया जाता है।

2 - एक प्रस्ताव का अन्वेषण तीन व्यक्तियों की समिति करती है इसमें से दो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और एक प्रख्यात विधिवेत्ता होता  है।

3 - यदि समिति यह पाती है कि न्यायाधीश कदाचार का दोषी है या न्यायाधीश असमर्थ है, तो प्रस्ताव समिति के प्रतिवेदन के साथ विचार के लिए उस सदन में ग्रहण किया जाता है जिसमें प्रस्ताव लंबित होता है।

4 - यदि प्रस्ताव प्रत्येक सदन में उस सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत द्वारा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो तिहाई बहुमत द्वारा पारित  कर दिया जाता है, तो राष्ट्रपति को इस संबंध में समावेदन प्रस्तुत किया जाता है।

5 - राष्ट्रपति जब समावेदन पर हस्ताक्षर कर देता है, तो न्यायाधीश हटा दिया जाता है।

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