प्राक्कलन समिति-

-भारतीय संसद की सबसे बड़ी इस प्राक्कलन समिति में 30 सदस्य (सभी लोकसभा से) होते हैं तथा इसका संबंध वार्षिक बजट से होता है इसे अनुमान करने वाली वित्तीय समितियां स्थाई मितव्ययिता समिति भी कहा जाता है इसके सदस्यों का निर्वाचन लोकसभा अपने सदस्यों में से प्रति वर्ष अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा एकल संक्रमणीय पद्धति के आधार पर करती है समिति के अध्यक्ष इन चुने हुए सदस्यों में से लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जाता है परंतु यदि लोकसभा का उपाध्यक्ष प्राक्कलन समिति का सदस्य है तो वह   स्वयं ही समिति का सभापति नियुक्त होता है किसी मंत्री को इस समिति का सदस्य नहीं बनाया जाता है इस समिति के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं-

1- इस विषय पर प्रतिवेदन प्रस्तुत करना कि प्राक्कलन ओं में कौन सी मितव्ययिता ,संगुणात्मक सुधार ,कार्यकुशलता या प्रशासनिक सुधार किया जाना चाहिए|

2- प्रशासन में कार्यकुशलता तथा मितव्ययिता लाने के के लिए वैकल्पिक नीतियों के संबंध में सुझाव देना|

3- या परीक्षण करना की नीतिगत पराक्रम की सीमाओं के अंतर्गत ही धन निकाला गया है अथवा नहीं|

4- यह सुझाव देना कि संसद के समक्ष पराक्रम को किस रूप में प्रस्तुत किया जाए इस प्रकार यह समिति वार्षिक अनुमानित बजट तथा सरकार के विभिन्न मंत्रालयों विभागों में परियोजनाओं के प्राक्कलन (अनुमानों) का बारीकी से अध्ययन एवं जांच करती है समिति के परामर्श ओं पर सदन में बहस नहीं की जाती है|

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