बुंदेलखंड का पठार

 बुंदेलखंड पठार के उत्तर में यमुना नदी दक्षिण में विंध्या पर्वत पश्चिम में  मालवा पठार कथा दक्षिण पूर्व में पन्ना अजयगढ़ की श्रेणियों का विस्तार है। इस पर उत्तर प्रदेश के ललितपुर ,झांसी, हमीरपुर, जालौन , छतरपुर तथा  मध्य प्रदेश के दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर  और पन्ना जिले का विस्तार है। इसका क्षेत्रफल 54560 किलोमीटर है यह रवेदार अग्नेय है तथा कायांतरित चट्टानों से निर्मित है। यहां उत्तर प्रदेश की गंगा जमुना को जलोढ़ तथा दक्षिण में दक्कन ट्रैप के बेसाल्ट चट्टानों  से ढका हुआ है इसका सामान्य ऊंचाई 300 से 400 मीटर मध्य में बेतवा ,धूसान तथा केन इस पठार पर प्रवाहित होते हुए कई गर्जो जलप्रपात  तथा खडो का निर्माण करती हैं। यह एक शुष्क पठार है। यहां सिंचाई सुविधा का विकास न हो पाने के कारण कृषि कार्य पिछड़ा हुआ है। किसानों के द्वारा आत्महत्या का घटनाएं बहुधा सुनने को मिलता है। इस पठार पर तिलहन और दलहन का उत्पादन किया जाता है। इस पठार का सबसे महत्वपूर्ण नदी बेतवा नदी है। जिस पर माताटीला बांध आदि बांधे स्थित हैं। यहां सूखे से बचने के लिए अमृत क्रांति योजना के तहत केन तथा बेतवा नदी को जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। जिससे कि वहां के कृषि में सुधार  हो सके।
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