भूमिकर व्यवस्था-1

भूमिकर व्यवस्था

      स्थायी बन्दोबस्त-बंगाल, बिहार, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश में वाराणसी एवं गाजीपुर क्षेत्र में तथा उत्तरी कर्नाटक क्षेत्र में लागू किया था।

      स्थायी बन्दोबस्त में ब्रिटिश भारत का 19 प्रतिशत क्षेत्र आता था।

      रैय्यतवाड़ी व्यवस्था-यह किसानांे के साथ व्यक्तिगत रूप से किये गये लगान समझौते को रैय्यतवाड़ी व्यवस्था कहा जाता था। यह व्यवस्था मद्रास, बम्बई, असम और दुर्ग मंे लागू थी। ब्रिटिश भारत की 51 प्रतिशत भूमि थी।

      महालवाड़ी व्यवस्था-इस पद्वति के जन्मदता हाल्ट मैकेन्जी थे। यह उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब में लागू था जो कि भारत के क्रम में भू भाग का 30 प्रतिशत था

कम्पनी का संवैधानिक विकास

      रेग्यूलेटिंग एक्ट (1773)-इस एक्ट के द्वारा निदेशक मंडल पर संसद के प्रत्यक्ष नियत्रंण की व्यवस्था की गयी।

      रेग्यूलेटिंग एक्ट के द्वारा (1774) मे कलकत्ता में एक सप्रीम कोर्ट की स्थापना की गयी। कम्पनी के मामलो मंे ब्रिटिश सरकार का पहली बार नियत्रंण रेग्यूलेटिंग एक्ट द्वारा स्थापित हुआ।

      पिट्स इंण्डिया एक्ट 1784 मंें इस एक्ट में गर्वनर जनरल की कार्यकारिणी के सदस्यों की संख्या 4 से घटकर 3 कर दिया गया और बम्बई और मद्रास की सरकारे इसके अधीन कर दी गयी।

      इस एक्ट में यह घोषणा की गयी कि भारत में राज्य विस्तार और विजय की नीति को त्याग दिया जाय ।

-शेष अगले भाग में

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