1857 का भारत सरकार का अधिनियम -
1. इस अधिनियम के द्वारा ईस्ट इंडिया कम्पनी का शासन समाप्त कर ब्रिटिश क्राउन को सौंप दिया।
2. गवर्नर जनरल अब वायसराय कहा जाने लगा।
1861 का भारतीय परिषद अधिनियम-
1. इस एक्ट के द्वारा भारत सरकार की मंत्रिमंडलीय व्यवस्था की नींव रखी गयी।
2. गवर्नर जनरल को संकटकालीन अवस्था में विधान परिषद की अनुमति के बिना ही अध्यादेश जारी करने की अनुमति दे दी गयी। ये अध्यादेश अधिक से अधिक 6 माह तक ही लागू रह सकते थे।
1892 का भारतीय परिषद का अधिनियम-इस अधिनियम का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष निर्वाचन पद्वति का आरम्भ होना था।
विधान मंडल के सदस्यों के अधिकारों को दो पक्षों में बाँट दिया गया। पहला भाग- बजट पर उन्हें अपने विचार प्रकट करने का अधिकार दिया लेकिन बजट प्रस्ताव पर मतदान करने अथवा सदन में मत विभाजन का अधिकार उन्हें नही दिया गया था।
दूसरा यह कि सार्वजनिक हित के मामलों में 6 दिन की सूचना देकर प्रश्न पूछने का भी अधिकार दिया गया।
भारतीय परिषद अधिनियम 1909 मारले मिण्टो सुधार-
इस अधिनियम द्वारा ब्रिटिश सरकार ने सम्प्रादायिक आधार पर निर्वाचन पद्वति को स्वीकार किया मुस्लमानों के लिये पृथक मताधिकार तथा निर्वाचन क्षेत्रों की व्यवस्था की गयी।
इस अधिनियम के द्वारा भारत सचिव की परिषद तथा भारत के वायसराय के कार्यकारिणी परिषद में सर्वप्रथम भारतीय सदस्यों को सम्मिलित किया गया।