राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने 2 नवंबर 2018 को भारत में स्थित न्यूट्रिनो वेधशाला को दी जाने वाली पर्यावरण संबंधी मंजूरी का सशर्त समर्थन किया।
कुछ समय पूर्व केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने इस परियोजना को मंजूरी दी थी, लेकिन विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति द्वारा दी गई मंजूरी को चुनौती दी गई थी। चुनौती में कहा गया है कि इस परियोजना का आकलन तमिलनाडु के राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) द्वारा किया जाना चाहिए था, जबकि इसका आकलन केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति द्वारा किया गया है।
न्यूट्रिनो वेधशाला (INO) :-
- भारत में स्थित न्यूट्रिनो वेधशाला (INO) एक बड़ी विज्ञान परियोजना है, जिसका उद्देश्य न्यूट्रिनो नामक कणों का अध्ययन करना है।
- न्यूट्रिनो वह मूल कण होते है जिनका सूर्य, तारो एवं वायुमंडल में प्राकृतिक रूप से निर्माण होता है।
- न्यूट्रिनो के बारे में पहले माना गया है कि यह द्रव्यमान रहित कण हैं किंतु हाल ही में न्यूट्रिनो डोलन परिघटना के निरीक्षण द्वारा किए गए प्रयोगों से यह सिद्ध नहीं होता है ।
- INO परियोजना में अन्य न्यूट्रिनो प्रयोग जैसे न्यूट्रिनो हीन दोहरे बीटा क्षय (NDBD) भी शामिल होंगे।
- NDBD प्रयोगों से न्यूट्रिनो की प्रकृति ( मैज़ारोना या डीरेक) चलेगा।