भारत में उच्चतम न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय की महत्ता और आवश्यकता को के सदानंद हेगडे द्वारा इस प्रकार रेखांकित किया गया है-" हमारे संविधान के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका प्रदान की गई है इसका संगठन संविधान के संरक्षक के रूप में किया गया है यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का रक्षक और संविधान का संतुलन चक्र है"|
यहां पर उल्लेख नहीं होगा कि भारत में लिखित और सबसे बड़ा संविधान को अपनाया गया है इसके साथ ही संविधान की सर्वोच्चता के सिद्धांत को मान्यता प्रदान की गई है उच्चतम न्यायालय द्वारा संविधान की सर्वोच्चता को बनाए रखने का कार्य किया जाता है उच्चतम न्यायालय के द्वारा संविधान के संरक्षक व अधिकारी के व्याख्याता के रूप में कार्य किया जाता है भारतीय संविधान द्वारा भारत में एक संघात्मक शासन व्यवस्था की स्थापना की गई है जिसके अंतर्गत संविधान द्वारा ही सही है और राज्य सरकार के मध्य शक्तियों का विभाजन किया जाता है उच्चतम न्यायालय द्वारा इस शक्ति विभाजन की संरक्षा की जाती है संविधान द्वारा इस शक्ति विभाजन के बावजूद जब कभी किसी विषय पर राज्य सरकारों के पीछे राज्य सरकारों में ही प्लस पर विवाद उत्पन्न हो जाता है तो ऐसे में इसका निपटारा उच्चतम न्यायालय द्वारा ही किया जाता है |
इस प्रकार उच्चतम न्यायालय के प्रमुख बिंदु उपर्युक्त है|