पृथ्वी के आंतरिक भागों में स्थित स्थित निकले पदार्थ को मैग्मा कहा जाता है यह मैग्मा ठोस तरल तथा गैसों का मिश्रण होता है मैग्मा में खनिज धातु तथा चट्टानों के पिछले भाग होते हैं मैग्मा अत्यधिक दाग होने कारण कमजोर चट्टानों को तोड़ता हुआ पृथ्वी के बाहर विस्फोटक रूप में निकल जाता है इस प्रक्रिया को ज्वालामुखी उद्गार कहते हैं मैं स्वयं का मार्ग निर्मित करके पृथ्वी की सतह तक पहुंचता है यह मार्ग पाइप की आकृति में होता है इस मार्ग को पाइप कहा जाता है ज्वालामुखी उद्गार के समय सर्वाधिक मात्रा में जलवाष्प का उत्सर्जन होता है इसके अतिरिक्त गैसों में सर्वाधिक उत्सर्जन कार्बन डाइऑक्साइड गैस पाया जाता है कार्बन डाइऑक्साइड के अतिरिक्त सल्फर डाई ऑक्साइड कार्बन मोनोऑक्साइड मीथेन नाइट्रोजन के ऑक्साइड इसके क्लोरीन इत्यादि कैसे उत्सर्जित होती है केवल ऑक्सीजन गैस का उत्सर्जन नहीं होता है ।
ज्वालामुखी उद्गार के समय बड़े तथा छोटे पत्थरों अथवा चट्टानों का भी उत्सर्जन होता है जिसमें खनिज एवं धातु के टुकड़े भी पाए जाते हैं। पदार्थों को पायरोक्लास्टिक पदार्थ खा जाता है विभिन्न आकार के आधार पर इन्हें अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे अत्यधिक बड़ी चट्टानों को बम इससे छोटी चट्टानों को बोल्डर तथा अत्यंत छोटे कंकड़ पत्थर को क्या कहा जाता है।
पृथ्वी की सतह पर प्रवाहित होने वाला पदार्थ लावा कहलाता है तथा लावा में मटर के दाने कथा लड्डू के आकार के खनिजों एवं धातुओं के टुकड़े करते हैं लावा के जमाव से निर्मित होने वाली कठोर चट्टान को व साल्ट कहते हैं व साल्ट चट्टान के अधिकारों के जमाव को काली मृदा कहा जाता है ज्वालामुखी पर्वतों का मुहाना जिसमें से सभी पदार्थों का उत्सर्जन होता है उसे क्रेटर कहा जाता है।
तथा क्रिएटर के विशालतम आकार को काल्डेरा कहते हैं जब ज्वालामुखी उद्गार समुद्र तट के निकट होता है तो 30 क्षेत्रों में लावा के जमाव से निर्मित होने वाली विभिन्न स्थल आकृतियों को ग्रेसिया कहा जाता है। ज्वालामुखी उद्गार के क्षेत्र में निकट छोटे-छोटे छिद्र अथवा दरारे निर्मित हो जाती हैं जिससे दुआ तथा गैस बाहर की ओर उत्सर्जित होती है इन क्षेत्रों तथा दरारों को दुआरे कहा जाता है।