जवाहरलाल नेहरू के जीवन काल के बाद भारत में पंचायती राज्य के विकास की गति अत्यंत शिथिल पड़ गई कई राज्य में बहुत लंबे समय तक पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव ही नहीं कराए गए कुछ राज्य में जिला स्तर पर समानांतर संस्थाओं का जन्म भी हो चुका था इसके कारण विकास नियोजन और क्रियान्वयन के बीच संबंधी में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा इन असफलताओं को देखते हुए 1977 में जनता पार्टी सरकार ने पंचायती राज की समीक्षा के लिए अशोक मेहता की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया वर्ष 1987 में इस समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी|
जो कि समिति की संस्तुति निम्न-
1- पंचायती राज के ढांचे को दो स्तरीय बनाया जाए जिला स्तर पर जिला परिषद और निचले स्तर पर 20 से 30 हजार तक की जनसंख्या वाले ग्राम समूहों के लिए मंडल पंचायत परिषद|
2- राज्य स्तर के नीचे जिला स्तर मस्त रहो जहां सार्वजनिक देखरेख में विकेंद्रीकरण के प्रक्रिया चले|
3- जिला परिषदों का गठन निर्वाचन द्वारा होना चाहिए तथा इसका अध्यक्ष गैरसरकारी व्यक्ति चुना जाना चाहिए|
4- जिला अधिकारी को जिला परिषद के अधीन किया जाना चाहिए|
5- पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा मिलना चाहिए|
6- पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव अनिवार्य रूप से समय पर कराए जाने चाहिए और चुनाव में राजनीतिक दलों को भाग लेने की सुविधा होनी चाहिए|
उल्लेखनीय है कि देश की राजनीतिक अस्थिरता के कारण अशोक मेहता समिति की सिफारिशों को लागू लागू नहीं किया जा सका था|