दक्कन ट्रैप का विस्तार मध्य प्रदेश के दक्षिणी भाग तथा कर्नाटक के उत्तर पश्चिम भाग गुजरात के उत्तर पूर्वी भाग तथा तेलंगाना के उत्तर पश्चिमी भागों पर इसका विस्तार लगभग 5000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इस प्रकार का निर्माण 60 से 65 मिलीयन वर्ष पूर्व कृटेशियस पीरियड मे तीन विभिन्न चरणों में ज्वालामुखी के दरारी उद्गार से उत्सर्जित लावा के निक्षेप से हुआ है। यहां बेसाल्ट चट्टानों के अपक्षय अपरदन से काली मृदा विकसित हुआ है। जिस का सर्वाधिक विस्तार महाराष्ट्र राज्य में है। सामान्तः ट्रैप शब्द का प्रयोग आग्नेय चट्टानों से निर्मित दृढ भूखंडों के लिए किया जाता है। इसमें लावा का कई चरणों में निश्चित होने से यह सीडी नुमा आकृति हो जाता है। ट्रैप स्वृडीस भाषा का शब्द है । जिसका शाब्दिक अर्थ सीढ़ी होता है ।इसमें करोड़ों वर्षों तक अनाच्छादन के प्रक्रिया से कई घाटीया तथा गर्त का निर्माण हुआ है। दक्कन ट्रैप में वैशाली चट्टानों का सामान्य औसत मोटाई 700 से 800 मीटर है।
दक्कन ट्रैप को लेते हुए उसके दक्षिण दिशा में दक्षिण भारत का पठार का संज्ञा दिया जाता है जो भारत के प्रायद्वीपीय पठार कहलाते हैं जो प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत के अनुसार ऑस्ट्रेलिया का भाग है।