ससंजक बल, आसंजक बल एवं कोशिकत्व

ससंजक बल तथा आसंजक बल

                एक ही प्रकार के पदार्थ के अणुओं के बीच लगने वाले बल को ससंजक बल कहते हैं, जबकि भिन्न-भिन्न प्रकार के पदार्थ के अणुओं के बीच लगने वाले बल को आसंजक बल कहते है।

                गैसों में ससंजक बल का मान कम होने के कारण उसमें विसरण पाया जाता है।

                आसंजक बल के कारण ही जल किसी वस्तु को भिगोता है। जब द्रव-ठोस के बीच आसंजक बल, द्रव के संसजक बल से अधिक होता है, तो वह द्रव उस ठोस को गीला कर देता है।

कोशिकत्व

                यह केशनली की वह विशेषता है जिसके कारण द्रव का स्तर या तो ऊपर चढ़ता है या नीचे गिरता है। केशनली एक कम त्रिज्या वाली खोखली नली होती है। केशनली में द्रव की ऊँचाई केशनली की त्रिज्या पर निर्भर करता है यदि द्रव में केशनली की दीवार में चिपकने की प्रवृत्ति नहीं होती है तो वह नली में ऊपर चढ़ेगा (काँच तथा जल) तथा यदि चिपकने की प्रवृत्ति होती तो उसका स्तर नीचे गिरता है (काँच एवं पारा)।

                कोशिकत्व के कारण होने वाली कुछ महत्वपूर्ण घटनाएँ-

                पौधों में जाइलम उत्तक के द्वारा जड़ से विभिन्न भागों में जल का पहुँचना।

                फाउन्टेन पेन (स्याही वाली कलम) का कार्य करना।

                स्याही सोख्ता का कार्य करना।

                लैम्प तथा लालटेन की वर्तिका से मिट्टी के तेल का ऊपर चढ़ना।    

मानसून से ठीक पहले किसानों द्वारा खेतों की जुताई केश-नलियों को तोड़ने के लिए किया जाता है।
Posted on by