वायसराय लॉर्ड कर्जन का सबसे घृणित कार्य 1955 में बंगाल का विभाजन था इस समय बंगाल में पूर्वी बंगाल (बांग्लादेश ),पं. बंगाल, बिहार एवं उड़ीसा शामिल थे। असम 1874 ईसवी में बंगाल से अलग हो चुका था।
लॉर्ड कर्जन ने बंगाल विभाजन करने का प्रमुख कारण क्या बताया कि एक लेफ्टिनेंट गवर्नर इतने बड़े प्रांत को कुशल प्रशासन नहीं दे पा रहा है तथा प्रशासनिक असुविधा हो रही है।
बंगाल विभाजन का वास्तविक कारण प्रशासनिक नहीं ,बल्कि राजनीतिक था। चूंकि बंगाल उस समय राष्ट्रीय चेतना का केंद्र बिंदु था, जिसे दबाने (नष्ट करने) के लिए कर्जन ने बंगाल का विभाजन कर उसे हिंदू व मुस्लिम बहुलता वाले दो भाग में बांटने और उन्हें आपस में लड़ाने की नीति अपनाई।
20 जुलाई ,1905 ई को बंगाल का विभाजन के निर्णय की घोषणा की गई तथा "बहिष्कार प्रस्ताव" पारित हुआ।
16 अक्टूबर , 1905 को बंगाल में 'शोक दिवस'के रूप में मनाया गया। लोगों ने उपवास रखा, वंदे मातरम का नारा लगाया तथा एकता के प्रतीक के रूप में एक दूसरे को राखी बांधी। सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने कहा कि "बंगाल का विभाजन हमारे ऊपर एक ब्रिज की तरह गिरा है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बनारस अधिवेशन में स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन का अनुमोदन किया गया।
इस समय प्रमुख नेता थे -सुरेंद्र नाथ बनर्जी ,कृष्ण कुमार मित्र, बाल गंगाधर तिलक ,अश्विनी कुमार दत्त, आनंद मोहन बोस, बिपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय आदि।
बंगाल विभाजन के विरोध में आरंभ हुआ स्वदेशी आंदोलन ना सिर्फ बंगाल बल्कि पूरे भारत में फैल गया
तिलक ने मुंबई क्षेत्र में इस आंदोलन का प्रचार एवं नेतृत्व किया, अजीत सिंह एवं लाला लाजपत राय ने पंजाब एवं उत्तर प्रदेश में, चिदंबरम पिल्लै व सुब्रह्मण्यम अय्यर ने चेन्नई में तथा सैय्यद हैदर खाँ ने दिल्ली में इस आंदोलन का नेतृत्व किया।
बहिष्कार आंदोलन के तहत विदेशी वस्त्रों, स्कूलों ,अदालतों ,उपाधियों ,सरकारी नौकरियों आदि का बहिष्कार किया गया।
स्वदेशी आंदोलन के तहत आत्मनिर्भरता एवं आत्मशक्ति का नारा दिया तथा राष्ट्रीय शिक्षा, उद्योग ,कारखाने आदि के निर्माण पर बल दिया गया।
इस आंदोलन में महिलाओं ने विदेशी चूड़ियों एवं विदेशी बर्तनों का बहिष्कार किया एवं प्रयोग करना बंद कर दिया।