✍ वित्त मंत्रलाय द्वारा बजट तैयार किये जाने के बाद सरकार बजट पेश करने के लिए एक तारीख सुझाती है. इसके बाद लोकसभा सचिवालय के सेक्रेटरी जनरल राष्ट्रपति की इस पर मंजूरी मांगते हैं.
✍ वित्त मंत्री लोकसभा में बजट पेश करते हैं. इसमें महत्वपूर्ण बिंदुओं और प्रस्तावों का जिक्र किया जाता है.
✍ वित्त मंत्री के बजट भाषण के दो हिस्से होते हैं. पहले हिस्से में आर्थिक सर्वेक्षण और नीतिगत घोषणाओं का एलान होता है, दूसरे हिस्से में टैक्स से जुड़ी घोषणाएं होती हैं.
✍ वित्त मंत्री के भाषण के बाद राज्य सभा के पटल पर ‘वार्षिक वित्तीय विवरण’ रखा जाता है.
✍बजट पेश किये जाने के बाद अगले दिन से बजट पर दो हिस्सों में चर्चा होती है – आम चर्चा और विस्तृत बहस.
✍ सदन का कोई भी सदस्य वितरित अनुदान में कटौती की मांग कर सकता है. इसके लिए डिसअप्रूवल ऑफ पॉलिसी कट, इकोनॉमी कट, टोकन कट की मांग की जा सकती है.
✍ इसके बाद लोकसभा में अप्रोप्रिएशन बिल वोटिंग के लिए पेश किया जाता है. अप्रोप्रिएशन बिल के बाद फाइनेंस बिल पर विचार किया जाता है. संसद इसे मनी बिल के तौर पर पास करती है.
✍ बिल पेश किए जाने के 75 दिन के अंदर इसे दोनों सदनों और भारत के राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत होती है. फाइनेंस बिल के पास होने और राष्ट्रपति के इस पर हस्ताक्षर होने के बाद बजट प्रक्रिया संपन्न हो जाती है.