राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम( नरेगा) इसकी शुरुआत 2 फ़रवरी, 2006 को आन्ध्रप्रदेश कै बान्दाचाली जिले के अनन्तपुर गाँव से हुआ । इसका नाम 2 अक्टूबर, 2009 को परिवर्तित करके मनरेगा-महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना कर दिया गया है । इसके नीति निर्माता ज्या देंज (बेल्जियम के अर्थशास्त्री) हैं । इसका क्रियान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा किया जाता है । शुरू में यह योजना 27 राज्यों के 200 जिलों में लागू हुआ था, अप्रैल, 2008 से यह 614 जिलों में लागू है । इसके तहत सभी ग्राम रोजगार योजना एवं काम के लिए अनाज योजना का विलय कर दिया गया । इस योजना के तहत केंद्र तथा राज्य सरकारों के मध्य 90 : 10 के अनुपात में वित्तीय सहयोग दी जाती है । इस योजना में प्रत्येक परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना है, जिसमें महिलाओ को भागीदारी 33% होगी । 15 दिन तक रोजगार उपलब्ध नहीं कराने पर बेरोजगारी भत्ता देना होगा । इस योजना के तहत कार्य को अवधि 7 घंटे होगी तथा सप्ताह में 6 दिन ही काम करना होगा । कार्य स्थल पर मृत्यु होने या स्थायी अपंगता की स्थिति में 25 हजार रुपये की राशि दी जायेगी । कार्य स्थल घर से 5 किलोमीटर से अधिक दूर होने पर 10% अतिरिक्त मजदूरी मिलेगी । इसका कार्यान्वयन नेशनल रूरल इम्पलायमेंट गारंटी अधिनियम सितम्बर, 2005 के द्वारा होता है । काम पाने का अधिकार एक कानूनी अधिकार है ।
नोट - : मनरेगा ग्रामीण गरीबों की संरक्षित करने की दिशा में प्रायोजित त्रिविधा-मनरेगा खाद्य सुरक्षा तथा ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में से एक है।