86 वें संवैधानिक संशोधन के परिणामस्वरूप संविधान के भाग-3 में अनुच्छेद 21-क समाविष्ट किया गया जिसके फलस्वरूप 6 से 14 वर्ष के बीच की आयु के सभी बच्चों के लिए नि: शुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा को मूल अधिकार बना दिया गया । बच्चों को नि: शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, 1 अप्रैल, 2010 से प्रभावी हो गया है । इस अधिनियम की कुछ प्रमुख व्यवस्थाएँ निम्न हैं-
(a) 6-14 वर्ष के प्रत्येक बच्चे को प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक अपने पड़ोस के विद्यालय में नि: शुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार होगा ।
(b) तीन वर्ष के भीतर जहाँ पास में विद्यालय नहीं है तो सरकार या स्थानीय प्रशासन विद्यालय की स्थापना करेगा ।
(c) अधिनियम के पालन के लिए वित्त की व्यवस्था करना केंद्र एवं राज्य सकार की जिम्मेदारी होगी ।
(d) पड़ोस के विद्यालय में प्रवेश दिलाने की जिम्मेदारी माता-पिता या अभिभावक की होगी।
(e) प्रवेश के लिए न ही किसी प्रकार की फीस ली जाएगी न ही जाँच परीक्षा ली जाएगी ।
(f) कोई अध्यापक कोई निजी ट्यूशन नहीं करेगा ।
(g) अधिनियम को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने के लिए बाल शिक्षा विशेषज्ञों की राष्ट्रीय परामर्शी परिषद की केन्द्र सरकार द्वारा स्थापना की जाएगी ।