क्रमशः..
Day - 19
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947
- मार्च, 1947 में लार्ड माउंटबेटन को लार्ड वैवेल के स्थान पर भारत का वायसराय नियुक्त किया गया। जिस दिन 1947 में ‘जून घोषणा’ हुई उसी दिन माउंटबेटन ने ब्रिटिश भारत के विभाजन की अपनी घोषणा प्रकाशित की। इसे कांग्रेस एवं मुस्लिम लीग दोनों ने स्वीकार किया।
- माउंटबेटन योजना को तुरन्त प्रभावी करने के लिए ब्रिटेन की संसद ने ‘भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947’ पारित किया।
- यह विधेयक 16 जुलाई, 1947 को ब्रिटिश संसद द्वारा पारित हुआ और 18 जुलाई, 1947 को शाही संस्तुति मिलने पर इसने अधिनियम का रूप ले लिया।
- ब्रिटिश सत्ता के अधीन यह अन्तिम अधिनियम था।
- इस अधिनियम में निम्नलिखित महत्वपूर्ण व्यवस्थायें की गई थीं-
- 15 अगस्त, 1947 को भारत एवं पाकिस्तान दो स्वतंत्र अधिराज्य (उपनिवेश) स्थापित हो जायेंगे।
- प्रारम्भ में प्रत्येक अधिराज्य के लिए इंग्लैण्ड के सम्राट द्वारा एक-एक गवर्नर जनरल की नियुक्ति की जायेगी।
- 14 अगस्त, 1947 के बाद भारत एवं पाकिस्तान पर से ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण पूर्ण रुप से समाप्त हो जायेगा।
- दोनों राज्यों के लिए संविधान तैयार करने हेतु संविधान – निर्मात्री सभाओं का गठन किया जायेगा और जब तक नया संविधान बनकर तैयार एवं लागू नहीं हो जाता, तब तक दोनों स्वतंत्र अधिराज्यों का प्रशासन भारत सरकार अधिनियम 1935 के अनुसार चलता रहेगा।
- प्रत्येक उपनिवेश के विधान मण्डल को विधान बनाने की सम्प्रभु शक्ति होगी।
- ब्रिटिश संसद द्वारा पारित विधान किसी उपनिवेश पर लागू नहीं होगा।
- संविधान सभा की शक्तियों पर कोई मर्यादाएं नहीं होंगी। संविधान सभा अन्तरिम अवधिअवधि के लिए संसद के रूप में कार्य करेगी।
- भारतीय रियासतों को यह अधिकार दिया गया कि वे अपनी इच्छानुसार भारत या पाकिस्तान में रहने का निर्णय लें।
15 अगस्त, 1947 से 26 जनवरी, 1950 तक भारत का राजनीतिक दर्जा ब्रिटिश राष्ट्रकुल का एक उपनिवेश राज्य (Dominion State) का रहा।
जारी..
मिलते है हम अगले दिन, भारतीय संविधान का निर्माण, प्रकृति एवं उसकी विशेषताएं विषय पर चर्चा करने के लिये..