कर्नाटक का पठार

कर्नाटक पठार का विस्तार कर्नाटक राज्य के अधिकांश क्षेत्र में है। इसका विस्तार केरल के कंण्णूर, कासर गोर (राष्ट्रीय रबड़ स्थान स्थित है) कोझिकोड वायनाड जनपदों में भी है। इस पठार का क्षेत्रफल 183340 वर्ग किलोमीटर है। इसके 75 % क्षेत्र पर अर्कियन सेल समूह तथा शेष पर धारवाड़ क्रम कुडप्पा क्रम तथा कुछ उत्तरी भाग में दक्कन ट्रैप का वैसाल्ट चट्टानों भी मिलते हैं ।इसका औसत ऊंचाई 600 से 900 मीटर है। इस प्रकार पर मणिपुरी का पहाड़िया, चिकमगुरलूर का पहाड़ियां, बबाबूदन पहाड़ियां का विस्तार है। बबाबेदन का सबसे ऊंची चोटी मुलानगिरी 1923 मीटर है। यह कर्नाटक या मध्य सहयात्री की सबसे ऊंची चोटी है। इसके पश्चात कुदरेमुख 1892 मीटर का स्थान आता है।इसे मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया जाता है।
(1) मैसूर पठार
(2) धारवाड़ पठार
(3) मालनाड पठार

मैसूर पठार :-
इसका सामान्य डाल पूर्व की ओर है ,और पश्चिम में पश्चिमी घाट, पूर्व में पूर्वी घाट तथा दक्षिण में नीलगिरी के पहाड़ियों का विस्तार है। इस पठार का प्रमुख नदी कावेरी है। यह प्राचीन अग्नि चट्टान तथा रूपांतरित चट्टानों से बना है। इसमें ग्रेनाइट ,नीस तथा क्कारजाइट चट्टानों का प्रधानता है।यह पठार मैग्नीज ,लोहा ,सोना में सम्मिलित है। यहां के ग्रेनाइट चट्टानों का उद्योग भवन निर्माण के लिए किया जा रहा है।

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