आधे घंटे की चर्चा - जिन प्रश्नों का उत्तर सदन में दे दिया गया हो , उन प्रश्नों से उत्पन्न होने वाले मामलों पर चर्चा लोकसभा में सप्ताह में तीन दिन , यथा सोमवार , बुधवार तथा शुक्रवार को बैठक के अंतिम आधे घंटे में की जा सकती है । राज्यसभा में ऐसी चर्चा किसी दिन , जिसे सभापति नियत करे , सामान्यत : 5 बजे से 5 . 30 बजे के बीच की जा सकती हैं । ऐसी चर्चा का विषय पर्याप्त लोक महत्त्व का होना चाहिए तथा विषय हाल के किसी तारांकित , अतारांकित या अल्प सूचना का प्रश्न रहा हो और जिसके उत्तर के किसी तथ्यात्मक मामले का स्पष्टीकरण आवश्यक हो । ऐसी चर्चा को उठाने की सूचना कम से कम तीन दिन पूर्व दी जानी चाहिए ।
अल्पकालीन चर्चाएं - भारत में इस प्रथा की शुरुआत 1953 ई० के बाद हुई । इसमें लोकमहत्त्व के प्रश्न पर सदन का ध्यान आकर्षित किया जाता है । ऐसी चर्चा के लिए स्पष्ट कारणों सहिंत सदन के महासचिव को सूचना देना आवश्यक होता हैं । इम सूचना पर कम से कम दो अन्य सदस्यों के हस्ताक्षर होना भी आवश्यक हैं ।
लेखानुदान - विनियोग विधेयक के पारित होने के बाद ही भरत की संचित निधि से कोई रकम निकाली जा सकती हैं ; किन्तु कभी - कभी सरकार को इस विधेयक के पारित होने के पहले भी रुपयों की आवश्यकता पड़ जाती है । अनुच्छेद 116 ( क ) के अन्तर्गत लोकसभा लेखा - अनुदान ( Vote on Ac bturt ) पारित कर सरकार के लिए एक अग्रिम राशि मंजूर कर सकती है , जिसके बारे में बजट - विवरण देना सरकार के लिए सम्भव नहीं हैं ।