निर्वाचन
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66 में उपराष्ट्रपति के निर्वाचन सम्बन्धी प्रावधान किए गए हैं । उपराष्ट्रपति के चुनाव में संसद के दोनों सदनों के सदस्य भाग लेते हैं , अर्थात उपराष्ट्रपति का निवाचन राज्यसभा तथा लोकसभा के सदस्यों के द्वारा किया जाता है । यहा उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति के चुनाव की तरह इसमें राज्य विधानमण्डल के सदस्य इसमें भाग नहीं लेते हैं । यह निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत तथा गुप्त मतदान के द्वारा होगा । उपराष्ट्रपति पद के लिए अभ्यर्थी का नाम 20 मतदाताओं के द्वारा प्रस्तावित और 20 मतदाताओं के द्वारा समर्थित होना आवश्यक है । साथ ही अभ्यर्थी द्वारा 15 , रुपये की जमानत राशि जमा करना आवश्यक होता है ।
उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से सम्बन्धित किसी भी विवाद निर्णय उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाएगा ( अनुच्छेद 71 )। यदि निर्वाचित उपराष्ट्रपति के पद ग्रहण करने के बाद उच्चतम न्यायलय के द्वारा उपराष्ट्रपति के निर्वाचिन को अवैध घोषित किया जाता है तो पद पर रहते हुए उपराष्ट्रपति द्वारा किये गये कार्य को अवैध नहीं माना जाएगा ।
पदावधि
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67 के अनुसार , उपराष्ट्रपति अपने पद ग्रहण करने की तिथि से पाँच वर्ष तक अपने पद पर बना रहेगा और यदि उसका उत्तराधिकारी इस पाँच वर्ष की अवधि के दौरान नहीं चुना जाता है , तो वह तब तक अपने पद पर बना रहेगा , जब तक उसका उत्तराधिकारी निर्वाचित होकर पद ग्रहण नहीं कर लेता है । लेकिन उपराष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तारीख से पाँच वर्ष के अन्दर भी अपने पद से निम्नलिखित ढंग से हट सकता है या हटाया जा सकता है
• राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र देकर ,
• • राज्यसभा के द्वारा संकल्प पारित करके ।
उपराष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए संकल्प या राज्य सभा में किया जाता है , लेकिन उपराष्ट्रपति को पद से हटाने का राज्यसभा में पेश किया जाता है, लेकिन उपराष्ट्रपि को पद से हटाने का प्रस्ताव राज्यसभा में पेश करने के पहले उसकी सूचना उन्हें 14 दिन पूर्व देना आवश्यक है । राज्यसभा में संकल्प पारित होने के बाद उसे अनुमोदन के लिए लोकसभा को भेजा जाता है । यदि लोकसभा संकल्प को अनुमोदित कर देती हैं तो उपराष्ट्रपति को पद से हटा दिया जाता है । कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने की स्थिति में उपराष्ट्रपति को महाभियोग द्वारा केवल उसी प्रक्रिया के तहत हटाया जा सकेगा , जिस प्रक्रिया से संविधान में राष्ट्रपति पर महाभियोग स्थापित करने का प्रावधान है ।
जो व्यक्ति उपराष्ट्रपति पद की आवश्यक योग्यता को धारण करता है , वह एक से अधिक कार्यालय के लिए निर्वाचित किया जा सकता है । लेकिन डॉ . सर्वपल्ली राधाकृष्णन के दो बार नवोचित किए जाने के बाद अब यह सामान्य परम्परा बन गयी है कि किसी व्यक्ति को एक बार ही उपराष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित किया जाए ।