जम्मू-कश्मीर पर राष्ट्रपति शासन के विषय में संक्षिप्त लेख

⚫ चर्चा में क्यों ? 
  
➡ जम्मू - कश्मीर पर राज्यपाल का शासन चल रहा है । यदि अगले दो महीने में इसकी विधानसभा भंग नहीं होती है तो इस राज्य पर जनवरी से राष्ट्रपति शासन लागू हो जाएगा ।

⚫ ऐसा क्यों ?
  
➡  जम्मू - कश्मीर का संविधान अलग हैं । इसके अनुच्छेद 370 के अनुभाग 92 में यह प्रावधान है कि यदि आवश्यक हो तो राष्ट्रपति के अनुमोदन से इस राज्य पर छह महीने के लिए राज्यपाल का शासन लागू किया जा सकता है ।
  
➡ यदि अगले छह महीने के भीतर इसकी विधानसभा भंग नहीं होती है तो इस पर भारतीय संविधान की अनुच्छेद 365 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू हो जायेगा ।
 
➡  राज्यपाल का शासन 19 जनवरी को समाप्त होने जा रहा है ।
  
➡ संविधान की अनुच्छेद 370 के तहत कश्मीर में राज्यपाल शासन है ।
 
➡  संविधान की अनुच्छेद 356 के तहत अन्य राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाने का प्रावधान है जबकि जम्मू कश्मीर के लिए अनुच्छेद 370 सेक्शन 92 के तहत राज्यपाल शासन लगाने का प्रावधान है ।
   
➡ राज्यपाल शासन की अवधि छह महीने की होती है , परन्तु इसे बढ़ाया भी जा सकता है । 
 
➡ राज्यपाल शासन के समय राज्यपाल के पास कानून बनाने का भी अधिकार होता है ।
 
➡  इस अवधि में वे जो भी कानून बनाएँगे वह राज्यपाल शासन की समाप्ति से दो वर्ष बाद तक मान्य होंगे ।

⚫ क्या होता है राष्ट्रपति शासन ?

➡ सविधान के अनुच्छेद 356 के अनुसार , यदि राष्ट्रपति को राज्यपाल से सूचना मिले अथवा उसे यह विश्वास हो जाए कि किसी राज्य में संविधान के अनुसार शासन चलाना असंभव हो गया है , तो वह घोषणा द्वारा उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है ।
 
➡  ऐसी स्थिति में वह राज्य की कार्यपालिका शक्ति अपने हाथों में ले सकता है ।राज्य के विधानमंडल की शक्तियाँ संसद राष्ट्रपति को दे सकती है ।
  
➡  राष्ट्रपति कभी भी दूसरी घोषणा द्वारा इस घोषणा को रद्द कर सकता है ।राष्ट्रपति शासन के लिए संसद के दोनों सदनों की स्वीकृति आवश्यक है । 
  
➡ यह शासन मूलतः छह महीने के लिए होता है किन्तु यदि आवश्यकता हो तो इसे आगे अधिकतम तीन वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकता है । 
 
➡ इस विस्तार के लिए हर छह महीने पर संसद का अनुमोदन अनिवार्य होता है ।

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