महासागरीय धाराएँ (OCEAN CURRENTS) भाग 2

( 2 ) तापमान में भिन्नता ( Difference in Temperature ) उष्ण सागरों में जल का घनत्व तापमान ऊँचा रहने पर घट जाता है । तथा जल हल्का होकर फैलता है , जबकि तापमान गिरने से जल का घनत्व अधिक हो जाता है तथा भारी एवं ठण्डा जल संकुचि होकर नीचे बैठ जाता है । परिणामस्वरूप गरम जल धारा के रूप में ठण्डे प्रदेशों की ओर प्रवाहित होने लगता है । इसके विपरीत , ठंडे भागों का जल गरम भागों की ओर बहता है । उत्तरी ध्रुव प्रदेशों से लैब्राडोर तथा क्यूरोसिवो की ठण्डी गरम जल धाराएँ उत्तरी ठण्डे ओर चलती हैं ।

( 3 ) जल का खारापन ( Salinity of Water ) – खारेपन की कहीं अधिक और कहीं कम होती है । अधिक खारे जल का घनत्व भी अधिक हो जाता है , जबकि कम खारेपन से उसका घनत्व कम रहता है । अधिक घनत्व वाला जल नीचे बैठ जाता है । फलस्वरूप अपने घनत्व को समान रखने के लिए कम घनत्व के स्थानों से जल अधिक घनत्व वाले स्थानों की ओर बहता है , जिससे धाराओं की उत्पत्ति होती है । इस तरह की धाराएं खुले तथा बन्द सागरों के मध्य चला करती हैं । अटलांटिक महासागर ( अपेक्षाकृत कम खारा ) से जिब्राल्टर जलडमरूमध्य से होकर रूम सागर की ओर धारा चलने का यही कारण है । रूम सागर की सतह के नीचे का जल अधः प्रवाह के रूप में अटलांटिक महासागर की ओर चलने लगता है । * इसी तरह की धाराएं लालसागर ( अधिक खारा ) तथा अरब सागर के बीच में भी चलती हैं । 


( 4 ) महाद्वीपों का आकार ( Form of Continent ) - धाराओं की प्रवाह दिशा पर महाद्वीपों के आकार तथा बनावट का भी गहरा प्रभाव पड़ता है । दक्षिणी विषुवत्रेखीय जलधारा पश्चिम की ओर चलने की अपेक्षा सेण्ट रॉक अन्तरीप ( ब्राजील ) से टकराकर उत्तर । तथा दक्षिण को मुड़ जाती है । इसी प्रकार अलास्का तट की स्थिति के । कारण ही अलास्का धारा पश्चिम की ओर बहने लगती है । 

( 5 ) पृथ्वी की परिभ्रमण गति ( Rotation of the Earth ) सागरों में धाराओं का प्रवाह प्रायः गोलाकार देखा जाता है । धाराओं की यह प्रकृति पृथ्वी के परिभ्रमण से सम्बन्धित है । फैरेल के नियमानुसार , धाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में दायीं ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बायीं ओर मुड़ जाती हैं । इसी कारण धाराओं का प्रवाह धीरे - धीरे गोलाकार बन जाता है ।


( 6 ) तलीय आकृतियाँ – महासागरीय तली की असमानताएँ धाराओं के मार्ग को प्रभावित करती हैं । जब इन धाराओं के मार्ग में अन्तःसागरीय कटक ( submarine ridges ) होते हैं तो धाराएं कुछ दाहिनी ओर मुड़ जाती हैं । उदाहरण के लिए गल्फ स्ट्रीम स्काटलैण्ड के पास जब विविलटामसन कटक को पार करती है तो वह दाहिनी ओर मुड़ जाती हैं । इसी कारण उत्तरीय विषुवत् रेखीय धारा मध्य अटलांटिक कटक को पार करते समय दाहिनी ओर मुड़ जाती है ।

Posted on by