काकोरी कांड

 अगस्त 1925 ईसवी में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्यों की में लखनऊ के निकट काकोरी नामक स्थान पर लखनऊ जाने वाली गाड़ी के एक रेल के डिब्बे में रखे सरकारी खजाने को लूट लिया इस घटना से 29 क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर उन पर काकोरी षड्यंत्र कांड में 2 वर्ष तक का मुकदमा चलाया गया क्रांतिकारियों में राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक, उल्ला खान, रोशन लाल तथा राजेंद्र लाडी को फांसी दे दी गयी।

काकोरी कांड में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के अधिकांश नेता गिरफ्तार कर लिए गए जिसके परिणाम स्वरूप इस संगठन का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया कुछ समय पश्चात इस कांड के एक मात्र बच्चे क्रांतिकारी सदस्य चंद्रशेखर आजाद ने सन 1928 ईस दिल्ली में फिरोज शाह कोटला मैदान में एक बैठक की और उन्होंने यही पर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना की।

हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का पहला क्रांतिकारी कार्य लाहौर के सहायक पुलिस अधीक्षक सांडर्स की हत्या थी यह हत्या 30 अक्टूबर 1928 को साइमन कमीशन के विरोध के कारण लाला लाजपत राय की पुलिस द्वारा की गई पिटाई का प्रतिरोध थी सांडर्स की हत्या में भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद और राजगुरु शामिल थे।

सांडर्स की हत्या के बाद क्रांतिकारी तो घूम देते हो गए परंतु ब्रिटिश पुलिस निर्दोष अथवा सामान्य जनता को परेशान करने लगी पुलिस का ध्यान अपनी ओर बांटने के लिए भगत सिंह एवं बटुकेश्वर दत्त ने केंद्रीय विधान सभा में बम फेंका जिसमें इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया तथा मुकदमा चलाया गया भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त की गिरफ्तारी के साथ ही अन्य क्रांतिकारी गिरफ्तार किए गए और उन पर लाहौर षड्यंत्र कांड में संयुक्त रूप से मुकदमा चलाए गए। जेल में बंद इन कैदियों ने राजनीतिक बंदियों का दर्जा प्राप्त करने के लिए भूख हड़ताल प्रारंभ कर दी इनमें जतिन दास भी शामिल थे। हड़ताल के 64वें दिन जतिन दास का देहांत हो गया लाहौर कांड में अधिकांश क्रांतिकारी को दोषी पाया गया और उनमें से तीन भगत सिंह, सुखदेव ,राजगुरु को 23 मार्च 1931 को लाहौर में फांसी दे दी गई।

Posted on by