निमोनिया से भारत को खतरा : एक रिपोर्ट

⚫ संदर्भ 

➡ हाल ही में एक वैश्विक अध्ययन द्वारा चेतावनी दी गयी है । कि आसानी से उपचार किये जाने योग्य बीमारी निमोनिया से भारत में 2030 तक 17 लाख से अधिक बच्चों के मरने की आशंका है । 
 
➡ विश्व निमोनिया दिवस के मौके पर 12 नवम्बर , 2018 को जारी इस अध्ययन में पाया गया है कि इस संक्रामक बीमारी के चलते 2030 तक पांच साल से कम उम्र के 1 . 1 करोड़ बच्चों की मौत होने की आशंका है । 
 
➡ ' सेव द चिल्ड्रेन ' गैर सरकारी संगठन के मुख्य कार्यकारी अधि ! कारी पॉल रोनाल्ड्स ने कहा , ' ' यह विश्वास करना काफी मुश्किल हैं कि हर साल दस लाख बच्चे एक ऐसी बीमारी से  मर रहे हैं जिसे हराने के लिए हमारे पास जान और संसाधन हैं ।"

⚫  रिपोर्ट के मुख्य तथ्य 
  
 ➡   ब्रिटेन स्थित गैर सरकारी संगठन ' सेव द चिल्ड्रेन ' द्वारा यह रिपोर्ट जारी की गई है । 
  
➡ इस रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक मौतें नाइजीरिया , भारत , पाकिस्तान और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में हो सकती हैं ।
 
➡ सेव द चिल्ड्रेन की इस रिपोर्ट के अनुसार इनमें से एक - तिहाई यानी 40 लाख से अधिक मौतें टीकाकरण , उपचार और ' पोषण की दरों में सुधार के ठोस कदम से आसानी से टाली जा सकती है । 
 
➡ रिपोर्ट में कहा गया है कि मलेरिया , दस्त एवं खसरा को मिलाकर जितनी मौतें होती हैं , उससे कहीं ज्यादा अकेले इस बीमारी से मौतें होती हैं ।
 
➡ वर्ष 2016 में 8,80,000 बच्चों की मौत इसी बीमारी के कारण हुई थी ।इनमें से अधिकतर बच्चे दो साल से कम उम्र के थे ।
 
➡ इस अध्ययन के अनुसार वर्तमान रुझान के हिसाब से 2030 तक इस बीमारी से लगभग 10 , 865 , 728 बच्चों की मौत हो सकती है ।
 
➡ इसमें कहा गया है कि सबसे अधिक 17,30 ,000 बच्चे नाइजीरिया में , 17,10,000 बच्चे भारत में , 7,06,000 बच्चे पाकिस्तान में और 6,35000 बच्चे कांगो में मौत के मुंह समा सकते हैं ।

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