यह आंदोलन मुख्यातः बंगाल में केंद्रित था lइसकी शुरुआत त्रिपुरा के हसनाबाद में हुई lयहां से यह बंगाल में नोवाखोली तक फैल गयाl इस आंदोलन के प्रमुख नेता कमपाराम सिंह एवं भवन सिंग थे lनोवाखोली इस समय भीषण सांप्रदायिक दंगों से ग्रसित था lपरंतु इस आंदोलन में हिंदू और मुस्लिम किसानों ने एकता का प्रदर्शन किया इसमें बटाईदार किसानों ने निर्णय किया l
कि वे फसल का दो बटे तीन हिस्सा लेंगे और जमीदारों को एक बटे तीन हिस्सा ही देंगे बंटवारे की इस अनुपात के कारण इसे तेभागा आंदोलन कहते हैं सितंबर 1946 ईस्वी को बंगाल के प्रांतीय किसान सभा ने विभाग संबंधी क्लाउड कमीशन की सिफारिश को चालू लागू करने के लिए इस आंदोलन को शुरू किया था या आंदोलन नवंबर 1946 से फरवरी 1947 तक चला l
तिभागा आंदोलन का केंद्र उत्तरी बंगाल विशेष रूप से दिनाजपुर का ठाकुरगंज उपसंभाग और इससे सटा हुआ क्षेत्र जलपाईगुड़ी रंगपुर व मालदा था lमेमन सिंह (किशोरगंज)मिदनापुर और 24 परगना भी इस आंदोलन से प्रभावित थाl