चर्चा में क्यों ?
हाल ही में पापुआ न्यू गिनी में APEC शिखर सम्मेलन , 2018 सम्पन्न हुआ ।
ऐसा पहली बार हुआ कि किसी APP की बैठक में कोई संयुक्त घोषणा नहीं निर्गत की हो । इस सम्मेलन में प्रशांत क्षेत्र में वर्चस्व की लड़ाई खुल कर सामने आ गई ।
इसमें दो गुट थे - एक गुट ऑस्ट्रेलिया , अमेरिका और जापान का था तो दूसरी ओर चीन था ।
क्या है ?
AFPEC का फुल फॉर्म एशिया - प्रशांत आर्थिक सहयोग ( Asia Pacrifice Economic Cooperation ) हैं । यह एक क्षेत्रीय आर्थिक मंच है जिसकी स्थापना 1989 में हुई थी ।
इसमें 21 देश सदस्य हैं । इनके नाम हैं - ऑस्ट्रेलिया , ब्रूनेई दारुस्सलाम , कनाडा , चिली , चीन जनवादी गणराज्य , हांगकांग , चीन , इंडोनेशिया , जापान , कोरिया गणराज्य मलेशिया , मेक्सिको । न्यूजीलैंड , पपुआ न्यू गिनी , पेरू फिलीपींस , रूसी संघ , सिंगापुर , चीनी ताइपे , थाईलैंड , संयुक्त राज्य अमरीका और वियतनाम् ।
इन 21 देशों की जनसंख्या का विश्व की जनसंख्या के लगभग 40% के बराबर है ।
विश्व को सम्पूर्ण GDP का 54 % इन देशों के पास है और साथ ही विश्व व्यापार का 44% इन्हीं देशों के बीच होता है ।
इसका उद्देश्य एशिया - प्रशांत क्षेत्र के लोगों की खुशहाली में वृद्धि करना है । इस लक्ष्य को पाने के लिए Apec जिन वस्तुओं को बढ़ावा देता हैं , वे हैं - संतुलित समावेशी , सतत नवप्रवर्तक , सुरक्षित वृद्धि और आर्थिक एकसूत्रता ।
कार्य
एशिया - प्रशांत के सभी निवासियों को बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था में भागीदारी करने में सहायता पहुँचाती है ।
यह ग्रामीण समुदायों के लिए डिजिटल कौशल प्रशिक्षण देने तथा महिलाओं को अपने उत्पादों को विदेश में निर्यात करने में सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं ।
यह जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को समझते हुए सभी देशों को ऊर्जा की बचत करने तथा जंगल और सामुद्रिक संसाधनों के सतत प्रबन्धन को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है ।
यह सदस्य देशों को अपने ढंग से इन विषयों में कार्रवाई करने की छूट देता है - आपदा , महामारी और आतंकवाद ।