दलित वर्गों में आंदोलन-

सुधार आंदोलनों का एक प्रमुख उद्देश्य हिंदुओं के बीच तथाकथित निम्न जातियों का उद्धार करना भी था इन आंदोलनों ने तथाकथित निम्न जातियों के उत्पीड़न के प्रति लोगों को जागरूक करने में विशेषकर अस्पृश्यता को शर्मनाक प्रथा के खिलाफ एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा की अशोक जातियों के लोगों के मंदिर प्रवेश के लिए महाराष्ट्र केरल और तमिलनाडु में कई अभियान आयोजित किए गए|

पेरियार नाम से लोकप्रिय ई वी रामास्वामी नायकर ने बाद में आत्मसम्मान आंदोलन शुरू किया|

दलित वर्गों के आंदोलन के प्रमुख नेता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर थे दलित वर्गों के उद्धार और उत्थान के लिए उन्होंने कई ग्रंथ लिखे तथा पत्र पत्रिकाएं निकाली और संस्थाएं स्थापित की उन्होंने गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया और दलित वर्गों के हितों के लिए मांगे उठाई गांधी जी ने अस्पृश्यता की कुप्रथा को समाप्त करने के काम को बड़ा महत्व दिया उन्होंने अस्पृश्यता विरोधी कई संगठन स्थापित किए|

 निम्न जाति को उन्होंने हरिजन नाम दिया और इसी नाम से एक पत्रिका निकाली थी 1932 में ब्रिटिश सरकार ने तथाकथित  निम्न जाति 50 के लिए पृथक निर्वाचन की घोषणा कर दी|

 अंत में एक समझौता हुआ जिसके तहत पृथक निर्वाचन के निर्णय को वापस ले लिया गया उसी के साथ या अभी तय हुआ कि तथाकथित निम्न जातियों के लोगों के लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की जाए राष्ट्रीय आंदोलन और दलित वर्गों का संगठन भारतीय समाज के दलित समुदाय के उद्धार के लिए कार्य करते रहे|

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