अभिव्यंजनावाद (एक्स प्रेरोनिज्म)
कलाकार जब वाह्य रूप की अपेक्षा करके विषयवस्तु के प्रति निजी भावनाओं को अभिव्यक्त करने के उद्देश्य से कला निर्मित करता है, तब ऐसी कला को अभिव्यंजनावादी कला कहते है।
20वीं शताब्दी में अभिव्यंजनावादी कला का उत्थान जर्मनी में हुआ। और उसकी तुलना गोथिक कला की गूढ़ भावनाओं से की जाती है। ये कलाकार मानवीय शरीर एवं वस्तु के नैसर्गिक रूप को अपनी भावनाओं के अनुकूल बनाते है।
फार्डिनाड होडलर (1853 - 1918 ई0)
होडलर का जन्म 1853 ई0 में स्विस वर्न में हुआ था।
1889 में पेरिस की अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में उनका चित्र कुश्तीगीरों का जुलूस पुरस्कृत हुआ।
प्रमुख चित्र:- 1. कुश्तीगीरों का जुलूस 2. जीवन से संत्रस्त
3. वांचित आत्मायें 4. विलियम टेला।
ब्राक के मानवाकृतियों के चित्र-
1. विवस्त्र स्त्री
2. वाथलीन व जलपात्र
3. द्वन्दगान
4. ताश का खेल
5. मेडोलीन वादिका
6. सूर्य का रथ
ब्राक के अन्तिम चित्र:-
1. आसमान में उड़ती हुई दो या तीन चिड़ियाँ
2. घोंसले को लौटती मादा चिड़िया
नोट:-1937 ई0 में ब्राक को फ्रांस का कार्नेजी पुरस्कार तथा 1948 ई0 में बेनिस की द्विवार्षिकी का सर्वोच्च पुरस्कार प्राप्त हुआ।
ब्राक ने घनवादी चित्रण के लिए प्रायः वस्तुओं के समूह को विषय वस्तु के रूप मंे चुना। वस्तु चित्रों मं अधिकतर वाद्ययन्त्र, समाचार पत्र, भोजनगृह की सुपरिचित वस्तुएँ चित्रित की गयी। वस्तुतः ब्राक ऐसे घनवादी चित्रकार है, जिन्होंने सर्वाधिक वस्तुचित्रण किया।