हार्न ग्रीस (1887 - 1927 ई0)
इनका मूल नाम होसेविक्टोरियानों गोन्थालेथ था, लेकिन हार्न ग्रीस के नाम से घनवादी चित्रकार के रूप में प्रसिद्ध हुए। स्पेन के मेड्रिड में जन्में तथा पेरिस को अपनी कला साधना का केन्द्र बनाने वाले हार्न ग्रीस ने उसी मकान में अपना कला-कक्ष बनाया था, जहाँ पिकासो रहता था।
ग्रीस की घनवादी कृतियाँ अपेक्षाकृत अधिक ज्यामितीय एवं वास्तुकला के सौन्दर्य को प्रदर्शित करती है।
कला समीक्षको ने ग्रीस को बौद्धिक सिद्धान्तों तथा गणितीय कलाकार कहकर सम्बोधित किया था। वस्तुतः ग्रीस ने गणित के सिद्धान्तों को कला के माध्यम से रूप देने का प्रयास किया था।
यद्यपि संश्लेषणात्मक घनवाद को विकास की चरम अवस्था तक पहुँचाने का कार्य ग्रीस ने किया।
घनवाद के प्रणेता पिकासो ने हार्नग्रीस को सर्वाधिक बुद्धनिष्ट घनवादी चित्रकार माना था, जबकि स्वयं पिकासो की कला में चमकदार तथा ब्राक की घनवादी चित्रकला में काव्यात्मकता दिखाई देती है।
प्रमुख चित्र:- दीपक (सर्वश्रेष्ठ चित्र)
फर्नालेजे (1881 - 1955 ई0)
पेरिस के अर्जान्तोई गाँव में जन्में फर्नालेजे ने एक वर्ष तक सैनिक सेवा देने के पश्चात कला साधना प्रारम्भ की थी।
इनके चित्रों में नली के समान आकारों का बाहुल्य पाया जाता है। अतः कला समीक्षकों ने इन्हें घनवादी कहने के बजाय नलीवादी कहना अधिक पसन्द किया।
इनके बनाये गये चित्र ऐसे प्रतीत होते थे जैसे - नालियों, चक्रों, स्प्रिंग आदि पुर्जो को जोडकर बनाये गये यन्त्र है।
प्रमुख चित्र:-
1. जंगल में विवस्त्र मानव
2. आकारों का विरोध
3. यन्त्रों का समूह नित्य (पट्चित्र की श्रेणी में)
नोट:- फर्नालेजे ने संयुक्त राष्ट्र परिषद सभा भवन का भित्ति चित्रण के साथ-साथ कई अन्य सार्वजनिक भवनांे में भित्ति चित्रण किया।