अभिकेन्द्रीय बल - स्थिति जिसमें किसी वस्तु की परीक्षा केंद्र की ओर भागने की प्रवृति होती है तो लगने वाले इस बल को अभिकेंद्रीय बल कहा जाता है। इसी बल के कारण सूर्य के चारों ओर सभी ग्रह चक्कर लगाते हैं। और सर्कस में मौत का कुआं बनाया जाता है। साइकिल सवार द्वारा मोड़ों पर मुड़ते समय अपने शरीर को एक तरफ झुकाना पड़ता है , बल के उदाहरण हैं।ऐसी स्थिति जिसमें किसी वस्तु का केंद्र से परिधि की ओर भागने की प्रवृत्ति आ जाती है तो लगने वाले इस बल को अभिकेंद्रीय बल कहा जाता है। दूध में मक्खन निकालने वाली मशीन , कपड़ा धोने वाली मशीन इसी तरीके पर कार्य करती हैं चार चक्के की गाड़ियां जब घुमावदार मोड़ पर आती हैं, तो उसमें यही बल कार्य करने लगता है। इसे बैलेंस करने के लिए सड़क के एक तरफ ऊंची वह दूसरी तरफ नीची बनाई जाती हैं।
घर्षण बल - एक वस्तु एक दूसरी वस्तु की ऊपर बल लगाती है या सरकती है, तो वस्तु की शतहो के बीच एक बल कार्य करने लगता है। लेकिन यह बल विपरीत दिशा में उत्पन्न होता है इसे घर्षण बल कहते हैं। इसलिए वाहन के पहिए को खाचेदार बनाया जाता है सड़कों को खुर्दरा बनायी जाती हैं। इसी प्रकार घर्षण बल कम करना पड़ता है। इसलिए ध्रुव में तेल व गैस का उपयोग होता है।