4 . उपापचय ( Metabolism ) ; सजीवों की कोशिकाओं में होने वाले सम्पूर्ण जैव - रासायनिक क्रियाओं को उपापचय कहते हैं । यह क्रिया दो रूपों में सम्पन्न होती है । प्रथम को अपचय ( Catabolism ) कहते हैं , जो कि विनाशात्मक(destructive) क्रिया है । जैसे - श्वसन एवं उत्सर्जन । दूसरी - रचनात्मक ( Constructive ) प्रक्रिया है , जिसे उपचय (Anabo lism) की संज्ञा प्रदान की जाती है । जैसे - पोषण । इसीलिए सजीव कोशिकाओं के ‘ लघु रासायनिक उद्योगशालाओं ( Miniature Chemical Factories ) की उपमा प्रदान की गयी है ।
5 . श्वसन ( Respiration ) : जीवधारियों का मुख्य लक्षण श्वसन है । इस क्रिया में जीव वायुमंडल से ऑक्सीजन लेते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं । श्वसन के दौरान वसा , कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का विघटन होता है और ऊर्जा निकलती है । यह ऊर्जा एटीपी ( ATP = Adenosine tri - Phos pliate ) के रूप में निकलती है जिससे संपूर्ण जैविक क्रियाएं चलती हैं ।
6 . प्रजनन ( Reproduction ) : प्रत्येक जीव प्रजनन - क्रिया के माध्यम से अपने ही सदृश्य जीव उत्पन्न करते हैं । इस क्रिया के द्वारा ही वह अपने वंश को बनाये रखते हैं ।
7 . पोषण ( Nutrition ) : प्रत्येक जीव अपने क्रिया - कलापों के लिए आवश्यक ऊर्जा पोषण द्वारा प्राप्त करते हैं । पौधे अपना भोजन प्रकाश - संश्लेषण की विधि से बनाते हैं जबकि जंतु पौधों पर ही आश्रित रहते हैं । निर्जीव वस्तुओं में इस प्रकार से भोजन बनाने का गुण नहीं होता है ।
8 . अनुकूलन ( Adaptation ) : जीवों में यह क्षमता होती है कि वे जीवन संघर्ष में सफल होने के लिए अपनी संरचनाओं एवं कार्यों में परिवर्तन कर लेते हैं ।
9 , संवेदनशीलता ( Sensitivity ) : जीव संवेदनशील होते हैं । वे वातावरण में होने वाले परिवर्तन का अनुभव करते हैं तथा उनके अनुसार अपने को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक परिवर्तन कर लेते हैं ।
10 . उत्सर्जन ( Excretion ) : सभी जीवधारियों द्वारा शरीर में उपस्थित हानिकारक पदार्थ - C0 , यूरिक अम्ल आदि - बाहर निकाले जाते हैं । सजीवों द्वारा सम्पन्न हुई यह क्रिया उत्सर्जन कहलाती है।