लाल कुर्ती आंदोलन

उत्तर पश्चिमी सीमा प्रांत में सामान्यता सीमांत गांधी के नाम से प्रसिद्ध खान अब्दुल गफ्फार खान ने अपने खुदाई खिदमतगार ईश्वर के सेवक संगठन के ध्वज और अपने स्वयंसेवकों के साथ इस आंदोलन में अत्यंत सक्रिय रूप से भाग लिएl वह स्वयं सेवक लाल कुर्ती पहने होते थे lअपनी पोशाक के कारण यह लाल कुर्ती के रूप में विख्यात हुएl

लाल कुर्ती आंदोलन विशुद्ध अहिंसक आंदोलन थाl कौमी आजादी के लिए इन्होंने कांग्रेस तथा गांधी का नेतृत्व स्वीकार कियाl लाल कुर्ती दल ने गफ्फार खां को खाने अफगान की उपाधि दीl उन्होंने पख़्तून  नामक एक पत्रिका पश्तो  भाषा में निकाली जो बाद में देश  रोजा नाम से प्रकाशित हुई lगफ्फार खान को बादशाह खान भी कहा जाता हैl

अप्रैल 1943 ईस्वी में जिन्ना ने गफ्फार खां को जंगी पठानों के हिंदूकरण तथा उन्हें नपुंसक बनाने में कार्यवाहक की संज्ञा दी थीl गफ्फार खा 1946 1947 ईस्वी में पाकिस्तान की मांग को लेकर सक्रिय आंदोलन कियाl भारत सरकार ने उपरांत भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किया थाl

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