वैदिक युग

जिस काल के इतिहास के बारे में जानकारी हमें वैदिक साहित्य से प्राप्त होती है उसे वैदिक युग कहते हैं। वैदिक युग के निर्माता आर्य थे। आर्य संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका तात्पर्य होता है श्रेष्ठ या कुलीन।

क्योंकि वह वैदिक काल के बारे में जानकारी हमें वेदों से प्राप्त होती है इसलिए हम इस काल को वैदिक काल की संख्या भी देते हैं वैदिक काल की जानकारी हमें प्रमुख चार वेदों से प्राप्त होती  ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद अर्थ वेद।

पूर्व वैदिक काल के इतिहास की जानकारी का एकमात्र साहित्यिक स्रोत ऋग्वेद होने के कारण इस काल को हम रिग वैदिक काल के नाम से भी जानते हैं।

वैदिक साहित्य आज हमें जिस रुप में प्राप्त होता है उसे संगीता कहते हैं ।वेद प्राय: पद्य में लिखा गया है इसका एक मात्र अपवाद यजुर्वेद है जो गधे तथा कांति दोनों में लिखा गया है इस प्रकार की शैली को चंपू शैली कहते हैं

ऋग्वेद वैदिक साहित्य में सबसे प्राचीन इसमें मूल स्वरों की संख्या 1017 है जिसमें बाद में 11 शब्दों को पृष्ठ रूप में जोड़े जाने के पश्चात सूत्रों की कुल संख्या 1028 हो गई है इसमें मंडलों की कुल संख्या 10 है जिसमें 2 से लेकर 7 तक के मंडलों को गोत्र मंडल कहते हैं। जो की सबसे प्राचीन मंडल हैं ऋग्वेद का सर्वाधिक न्यूनतम मंडल पहला और दसवां है

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