भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होगी तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री के परामर्श से होगी। सैद्धांतिक दृष्टि से राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है, किंतु व्यवहार में इस संबंध में राष्ट्रपति की शक्ति बहुत अधिक सीमित होती है लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को को प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त किया जाता है। मंत्री परिषद के शेष मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री के परामर्श पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। प्रधानमंत्री इस संदर्भ में स्वतंत्र होता है वह अपनी रुचि के व्यक्तियों को छांट कर उनकी सूची राष्ट्रपति के सम्मुख प्रस्तुत करता है संविधान में मंत्रिपरिषद के सदस्यों की संख्या निश्चित नहीं की गई है आवश्यकता पड़ने पर मंत्रियों की संख्या बढ़ा या घटा की जा सकती है व्यवहार में भारतीय मंत्री परिषद में विभिन्न समय पर 35 से लेकर 40 सदस्य रहे हैं और विधानमंडल या कैबिनेट में 12 से लेकर 25 सदस्य रहे हैं मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के अधिकतम 15% तक हो सकती है संविधान में मंत्रियों की योग्यता के संदर्भ में केवल इतना ही लिखा है कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद के प्रत्येक मंत्री को संसद के किसी सदन का सदस्य होना आवश्यक है यदि कोई व्यक्ति मंत्री बनते समय संसद सदस्य नहीं है तो उसे 6 माह के भीतर संसद का सदस्य बनाना अनिवार्य है अन्यथा उसको अपना पद क्या त्यागना पढ़ सकता है मंत्री परिषद के गठन के पश्चात प्रधानमंत्री द्वारा उनके बीच विभागों का विभाजन किया जाता है पद ग्रहण करने से पूर्व प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्रियों को राष्ट्रपति के समक्ष पद और गोपनीयता की प्रथक प्रथक शपथ लेनी पड़ती है मंत्री परिषद का कार्यकाल निश्चित नहीं होता है मंत्रिपरिषद तब तक अस्तित्व में बनी रहती है जब तक उसे लोकसभा का विश्वास प्राप्त रहता है मंत्रिपरिषद अधिक से अधिक लोकसभा के कार्यकाल तक जो सामान्यतः 5 वर्ष का होता है अपने पद पर बनी रहती है व्यक्तिगत रूप से किसी भी मंत्री का कार्यकाल उसके प्रधानमंत्री के विश्वास पर निर्भर करता है मंत्री परिषद में तीन स्तर के मंत्री होते हैं मंत्रिमंडल अथवा कैबिनेट स्तर के मंत्री मंत्री तथा उप मंत्री मंत्रियों से नीचे के स्तर पर संसदीय सचिव होते हैं यह मंत्रियों की संसदीय मामलों में सहायता करते हैं तीनों स्तरों के मंत्रियों को सामूहिक रुप से मंत्री परिषद के नाम से पुकारा जाता है।