शुंग वंश

मौर्योत्तर काल की एक प्रसिद्ध स्थानीय वंश का नाम शुंग वंश था ।इस वंश की स्थापना मौर्य काल के तुरंत बाद हुई ।
शुंग वंश का संस्थापक एक ब्राम्हण मौर्य सेनापति पुष्यमित्र शुंग था ।
इसने मौर्य वंश के अंतिम शासक बृहद्रथ की हत्या कर अपने वंश की स्थापना की। पुष्यमित्र शुंग के समय में ही यूनानीओं का भारत पर आक्रमण प्रारंभ हुआ। पुष्यमित्र शुंग के पुत्र वसुमित्र जो कि अग्निमित्र के पुत्र थे कि सेना ने हिंद यूनानीयों को पराजित किया। पुष्यमित्र शुंग ने दो अश्वमेघ यज्ञ और एक राजसूय यज्ञ कराया इन यज्ञ में पतंजलि में पुरोहित की भूमिका अदा की। पतंजलि ने पांचवी शताब्दी ईसा पूर्व के प्रसिद्ध व्याकरण आचार्य पाणिनी की अष्टाध्याई पर "महाभाष्य" नामक एक टीका ग्रंथ लिखा। पुष्यमित्र शुंग को अक्सर बौद्ध साहित्य में बौद्ध धर्म के कट्टर विरोधी के रूप में चित्रित किया जाता है जो कि सही नहीं है।
 बौद्ध साहित्य दिव्यावदान के अनुसार कहा जाता है कि उसने अशोक द्वारा निर्मित 84000 तोपों को नष्ट करवा दिया। 
अशोक के काल में निर्मित सांची के स्तूप के आकार को दोगुना कराने का श्रेय पुष्यमित्र शुंग को जाता है ।
परवर्ती कालीन शुंग वंश के शासकों के शासन काल में पाटलिपुत्र का महत्व घटता चला गया और उसके स्थान पर विदिशा का महत्व स्थापित हुआ।
 विदिशा  स्थित शुंग वंशीय 9वा शासक राजा भागभद्र के दरबार में ही तक्षशिला की यूनानी शासक एंटीआल्कीड्स राजदूत बनकर हेलिओडोरस आया था जिसने भागवत धर्म को अपनाया। हेलिओडोरस भागवत धर्म को अपनाने वाला प्रथम ज्ञात विदेशी शासक था।
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