वर्गीकरण और समजातता
वर्गीकरण और समजातता (Homology in classification) - जीवधारियों की संरचना की तुलना करते समय अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है, क्योंकि जीवधारियों के बिल्कुल अलग-अलग समूहों में सामानान्तर उद्विकास ( parallallel evolution) होने के कारण, ऐसी रचनाएं विकसित हो जाती हैं जो देखने में एक-सी लगती हैं, परन्तु होती नहीं हैं। इसमें जरा सी भी चूक होने पर बिल्कुल गलत निष्कर्ष निकल सकते हैं। उदाहरणतः तितलियों एवं पक्षियों को इस प्रकार की गलती से एक ही समूह में रखा जा सकता है, क्योंकि सरसरी निगाह से देखने पर दोनों में ही पंख होए हैं जिनकी सहायता से उड़ सकते हैं। परन्तु वास्तव में इनकी उत्पत्ति शरीर के भिन्न-भिन्न अंगों से होती है। ऐसे अंग जो बाह्य रचना तथा कार्य में एक जैसे मालूम पड़ें परन्तु अपने उद्गम तथा विकास की दृष्टि से वे बिल्कुल बिन्न हों, सदृश अंग कहलाते हैं।
इसके विपरीत, विभिन्न जीवधारियों में अनेक अंग जो कि देखने में तो बिल्कुल बिन्न मालूम पड़ते हैं और उनके कार्य भी भिन्न-भिन्न होते हैं, परन्तु उनकी उत्पत्ति भ्रुण के एक से भागों से ही होती है। ऐसे अंगों को समजात अंग कहते हैं। मनुष्य की बाजू, चमगादड़ के पंख, घोड़े के अग्रपाद तथा ह्वेल के फ्लिपर की मूल रचना एक-सी होती है। हड्डियों तथा मांसपेशियों का एक-सा विकास इन सब अंगों में देखने को मिलता है। इससे इस बात का संकेत मिलता है कि इन चारों जीवों का विकास एक ही पूर्वज से हुआ है।
शेष आगे भी वर्गीकरण पे चर्चा करते है ....