⚫ हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशों से वाणिज्यिक उधारी ( ईसीबी ) जुटाने के लिये नई नीति जारी की है ।इसमें सभी पात्र इकाइयों को स्वतः मंजूरी के रास्ते से विदेशी कोष जुटाने की मंजूरी दी गई है ।इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों पर लगे अंकुशों को भी हटा दिया गया है ।रिजर्व बैंक के मुताबिक सभी पात्र इकाइयाँ अब प्रत्येक वित्त वर्ष में स्वत : मंजूरी रास्ते से 75 करोड़ डालर अथवा इसके बराबर राशि तक विदेशी वाणिज्यिक उधारी जुटा सकती हैं ।यह नियम मौजूदा सीमा के स्थान पर लागू किया गया है ।
⚫ केन्द्रीय बैंक के अनुसार ईसीबी के 8 नियमों को कारोबार सुगमता को और बेहतर बनाने के ।लिए सरल किया गया है ।रिजर्व बैंक के अनुसार ।मौजूदा ईसीबी ढांचे के तहत ट्रैक एक और दो को मिलाकर डालर में अंकित ईसीबी और ट्रैक तीन और चार को मिलाकार अब रूपये में अंकित ईसीबी में परिवर्तित कर दिया गया है इस प्रकार मौजूदा चार स्तरीय ढांचे के स्थान पर नई व्यवस्था की गई है ।
⚫ नये नियमों के अनुसार सभी तरह के ईसीबी |के लिये न्यूनतम औसत परिपक्वता अवधि जब तक कि इसके लिये विशेष अनुमति नहीं दी गई हो , तीन साल रखा गया है इसमें चाहे राशि कितनी भी हो ।पात्र उधारकर्ताओं की सूची को |पूरी तरह बढ़ा दिया गया है ।इसमें विदेशी निवेश प्राप्त करने के लिये योग्य सभी इकाइयों को शामिल कर लिया गया है ।
⚫ यदि कोई निर्माता एक वित्तीय वर्ष में 50 मिलियन डॉलर का विदेशी ऋण लिया हो तो उसकी न्यूनतम औसत परिपक्वता अवधि एक वर्ष होगी ।
⚫ किसी भी विदेशी द्वारा विशेष प्रयोजन के |लिए ली गई ईसीबी की न्यूनतम औसत परिपक्वता |अवधि पाँच वर्ष की होगी ।
⚫ ईसीबी के प्रकार
⚫ लोन जैसे - बैंक लोन , इक्विटी धारक से लिया गया लोन।
⚫ कैपिटल मार्केट इंस्ट्रूमेंट जैसे - फिक्सड रेट बॉण्ड ।
⚫ क्रेता शाख / विक्रेता शाख ।
⚫ वित्तीय पट्टा आदि ।